
कानपुर में है मां कुष्मांडा का अनोखा धाम, यहां पिंडी से रिसता है चमत्कारिक जल
क्या आप चमत्कारों पर विश्वास करते हैं? दरअसल, उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ऐसी जगह है, जो किसी अजूबे से कम नहीं है।
हम बात कर रहे हैं घाटमपुर कस्बे में स्थित मां कुष्मांडा देवी के मंदिर की। मां कुष्मांडा को सृष्टि की रचना करने वाली ‘आदि शक्ति’ माना जाता है। आइए बिल्कुल आसान शब्दों में जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी अनोखी बातें जो सच में हैरान करने वाली हैं।
चमत्कारी जल, जो लौटाता है आंखों की रोशनीइस मंदिर की सबसे चौंकाने वाली बात यहां मौजूद माता की पिंडी है, जिससे बारह महीने पानी रिसता रहता है। यह पानी अंदर से कहां से आ रहा है, यह आज तक एक अनसुलझी पहेली है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि अगर कोई भी व्यक्ति लगातार 6 महीने तक इस बहते हुए जल को अपनी आंखों में लगाए, तो न सिर्फ आंखों से जुड़े बड़े से बड़े रोग ठीक हो जाते हैं, बल्कि खोई हुई रोशनी भी वापस लौट आती है।
दुनिया की इकलौती अनोखी पिंडीयहां माता की जो पिंडी है, वह पूरी दुनिया में अपने आप में इकलौती मानी जाती है। चतुष्टय यानी चार कोनों वाले आकार की इस पिंडी के दो मुख हैं। यह जमीन पर कुछ इस तरह लेटी हुई अवस्था में दिखाई देती है कि इसका कोई ओर-छोर ही समझ नहीं आता।
यहां पंडित नहीं, ‘मालिन’ करती हैं पूजाआमतौर पर मंदिरों में भगवान की सेवा पुजारी, पंडित या साधु-संत करते हैं, लेकिन कुष्मांडा माता मंदिर की परंपरा सबसे अलग है। सैकड़ों सालों से यहां देवी मां को कपड़े पहनाने, उनका मनमोहक शृंगार करने और भोग लगाने की पूरी जिम्मेदारी मालिन ही निभाती आ रही हैं। बता दें, यहां रोज बड़ी संख्या में लोग आते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी माँ की सेवा करते हैं।
नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाबनवरात्र के चौथे दिन यहां भक्तों का विशाल मेला लगता है और लाखों लोग पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर मां कुष्मांडा को मुख्य रूप से कच्चे चने का भोग लगाते हैं। इसके साथ ही देवी मां को ‘कुम्हड़ा’ बहुत पसंद है, इसलिए मंदिर में कुम्हड़े की बलि देने की भी खास परंपरा है।
कब जाएं और कहां ठहरें?दर्शन करने के लिए यह मंदिर सुबह 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक खुला रहता है। अगर आप यहां रात में रुकना चाहते हैं, तो घाटमपुर में ही गेस्ट हाउस आसानी से मिल जाते हैं।
मंदिर तक कैसे पहुंचें?हवाई जहाज से: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कानपुर है। वहां से आप सीधे कैब या टैक्सी बुक करके मंदिर जा सकते हैं।ट्रेन से: दर्शन के लिए पास का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन ‘कानपुर सेंट्रल’ है। स्टेशन के बाहर से ही मंदिर जाने के लिए आपको लोकल बस, ऑटो और टैक्सी आसानी से मिल जाएंगी।सड़क के रास्ते: कानपुर यूपी के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। शहर के भीतर से आप ई-रिक्शा, ऑटो या लोकल टैक्सी लेकर आराम से घाटमपुर स्थित मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
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