धनतेरस पर गाय को पहला निवाला खिलाना क्यों माना गया है सबसे बड़ा उपाय?

धनतेरस पर गाय को पहला निवाला खिलाना क्यों माना गया है सबसे बड़ा उपाय?

भारत के अधिकतर घरों में सदियों से एक परंपरा चली आ रही है, जब सुबह रसोई में बनने वाली पहली रोटी गाय के लिए निकाली जाती है। हिंदू दर्शन में किसी जीव को खाना खिलाना अत्यंत पवित्र और श्रेष्ठ सेवा (धर्म) माना गया है। बहुत से लोग रोजाना इस नियम का पालन करते हैं, लेकिन जो लोग नहीं करते हैं उन्हें कम से कम धनतेरस के मौके पर गाय को रोटी जरूर खिलानी चाहिए।

माना जाता है कि धनतेरस के मौके पर गाय के लिए पहला ग्रास यानी पहला निवाला निकालना अत्यंत शुभ माना जाता है। भारतीय संस्कृति में गाय को मातृत्व, पोषण और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में भी गाय पूजनीय योग्य है।

धनतेरस पर गाय को खिलाने की परंपराइस साल धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। इस दिन सोना, चांदी, पीतल-तांबे के बर्तन, नई वस्तु और झाड़ू खरीदने के साथ गाय के लिए पहला निवाला निकालना न भूलें। दरअसल धनतेरस पर गाय को खिलाने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जीवन में धन, सुख-समृद्धि और संपदा का आशीर्वाद देती हैं।

सनातन धर्म में माना जाता है कि गाय में 33 कोटि के देवी-देवताओं का निवास होता है। ऐसे में धनतेरस के शुभ अवसर गाय के साथ जानवरों को खिलाने और उनकी सेवा करने से सभी देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद मिलता है।

हिंदू पौराणिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी का एक स्वरूप गोमाता का भी माना गया है। धनतेरस पर आमतौर पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है, लेकिन गाय को खाना खिलाने से इस दिन का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है जो जीवन में सुख-समृद्धि और धन के आगमन को लाने का तेजी से करता है। माना जाता है कि गाय को खाना खिलाने से व्यक्ति को कर्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है।

धनतेरस पर गाय का भोगधनतेरस के दिन गाय माता को विशेष भोग अर्पित करने से जीवन में तरक्की के मार्ग खुलते हैं। गाय को खाना खिलाते समय ‘ऊं सुरभ्ये नम:’ मंत्र का जाप करना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि इस उपाय को करने से गाय माता आपके सभी विकार ले लेती हैं।

धार्मिक ग्रंथों में गाय का महत्वगाय को संस्कृत भाषा में धेनु कहा जाता है और इनकी पूजा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। हिंदू वेदों में गायों को ‘आधिदेविक’ माना गया है। देवताओं और दानवों में जब समुद्र मंथन हुआ था, तब 14 रत्नों में से एक रत्न गाय भी थी, जिसका नाम कामधेनु रखा गया था।

हिंदू धर्म से जुड़े प्रमुख ग्रंथों में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में उनकी सेवा और उन्हें खाना खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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