
बिना क्रेन और मशीन के 13,000 फीट ऊंची चट्टानों पर कैसे बनाए गए मठ?
ग्रीस के मध्य भाग में स्थित मेटियोरा एक ऐसी जगह है, जिसे देखकर हर इंसान हैरत में पड़ जाता है। प्रकृति और इंसान की आस्था का ये बहुत ही खास मेल है। दरअसल, यहां लगभग 13 हजार फीट ऊंची बलुआ पत्थर की चट्टानों पर प्राचीन मठ बने हुए हैं।
लोगों को हैरान करता है कि जब इन्हें दूर से देखा जाता है, तो ऐसा लगता है जैसे ये मठ जमीन पर नहीं, बल्कि सीधे बादलों और आसमान के बीच लटके हुए हैं। आइए इस अनोखी जगह के बारे में और जानते हैं।
आकाश में लटका हुआ शहरमेटियोरा शब्द का मतलब भी काफी दिलचस्प है। दरअसल, ये एक यूनानी शब्द से बना है, जिसका मतलब होता है आकाश में लटका हुआ। विज्ञान की नजर से देखें, तो इन विशाल चट्टानों का निर्माण करोड़ों साल पहले नदी और डेल्टा क्षेत्र में जमा हुए अवसादों से हुआ था।
समय के साथ धरती के अंदर हुई हलचलों, बारिश और तेज हवाओं ने इन्हें कांट-छांटकर खड़ी दीवारों और गहरी दरारों वाला रूप दिया।
11वीं सदी से जुड़ा है इतिहासइन विशाल बलुआ पत्थर की चट्टानों के ऊपर बने मठों का इतिहास 11वीं सदी से जुड़ा है। उस दौर में ईसाई संत संसार की मोह-माया से दूर शांत जगह में आध्यात्मिक साधना के लिए प्राकृतिक गुफाओं में रहने आए थे।
धीरे-धीरे ये छोटे आश्रम बड़े मठों के रूप में विकसिक हो गए। 14वीं और 15वीं शताब्दी आते-आते ये इलाका एक प्रमुख धार्मिक और मठवासी केंद्र बन गया। एक समय में यहां लगभग 24 मठ हुआ करते थे, लेकिन आज सिर्फ 6 मठ ही सुरक्षित हैं। ये मठ हैं ग्रेट मेटियारॉन, वरमाल, रूसानू, सेंट निकोलस अनापाफसास, होली ट्रिनिटी और सेंट स्टीफन।
दुर्गम चोटियों पर कैसे हुआ निर्माण?आज के समय में पर्यटक इन मठों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों और पक्की सड़कों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सदियों पहले ये सुविधा नहीं थी। उस समय इन सीधी और विशाल चट्टानों पर निर्माण सामग्री पहुंचाना अपने आप में एक नामुमकिन लगने वाली चुनौती थी। हालांकि, लोगों ने हार नहीं मानी। उन्होंने लकड़ी की सीढ़ियों, मजबूत रस्सियों, जालों और टोकरियों के सहारे लोगों और भारी सामानों को ऊपर पहुंचाया।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिलइंसान के दृढ़ संकल्प, शानदार वास्तुकला और प्रकृति के अजूबे के इस मेल को यूनेस्को ने 1988 में मेटियोरा को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। प्रकृति की खूबसूरती और इंसानों की संस्कृति के इस मेल को देखने आज दुनियाभर से पर्यटक आते हैं।
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