
मजबूत मसल्स के लिए सिर्फ प्रोटीन ही नहीं, आंतों की सेहत भी जरूरी?
आमतौर पर आंतों की सेहत के लिए फाइबर और प्रोबायोटिक्स से भरपूर भोजन, जबकि मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन और व्यायाम को जरूरी माना जाता है। लेकिन नए शोध से पता चलता है कि आंतों और मांसपेशियों के बीच गहरा संबंध हो सकता है।
वैज्ञानिक इसे ‘गट- मसल एक्सिस’ यानी आंत-मांसपेशी संबंध कहते हैं। किंग्स कालेज लंदन के शोधकर्ता डोमिनिक फारसी के अनुसार, दही, केफिर और काटेज चीज जैसे किण्वित खाद्य पदार्थ इस संबंध को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आंतों के बैक्टीरिया का मांसपेशियों पर असरआंतों में कई तरह के सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये शरीर में पोषक तत्वों के इस्तेमाल, ब्लड शुगर के नियंत्रण और सूजन को नियंत्रित करने जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। शोध की समीक्षा में पाया गया कि आंतों की स्वस्थ परत हानिकारक पदार्थों को रक्त में जाने से रोकने में मदद करती है। आंतों के सूक्ष्मजीवों या इस परत में बदलाव होने से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जिसका असर मांसपेशियों समेत पूरे शरीर की सेहत पर पड़ सकता है।
प्रोटीन के इस्तेमाल में भी मददआंतों में होने वाली गतिविधियां शरीर के हार्मोन और मेटाबालिज्म को भी प्रभावित करती हैं। गट माइक्रोबायोम भोजन में मौजूद पोषक तत्वों के टूटने और उनके अवशोषण की प्रक्रिया को बदल सकता है। इससे अमीनो एसिड की उपलब्धता प्रभावित हो सकती अमीनो एसिड प्रोटीन के निर्माण खंड हैं, जो मांसपेशियों की वृद्धि और उनके सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी होते हैं। यह संबंध एकतरफा नहीं है। मांसपेशियां भी ऐसे संकेत देने वाले अणु और मेटाबॉलिज्म के दौरान बनने वाले पदार्थ पैदा करती हैं, जो आंतों समेत शरीर के दूसरे ऊतकों को प्रभावित कर सकते हैं।
फर्मेंटेड फूड्स क्यों है खास ?किण्वन यानी फर्मेंटेशन की प्रक्रिया में सूक्ष्मजीव भोजन के प्रोटीन और अन्य घटकों को तोड़ते हैं। इससे प्रोटीन को पचाना आसान हो सकता है और अमीनो एसिड शरीर को अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ ऐसे जैव सक्रिय पदार्थ भी बनते हैं, जिनमें एंटीआक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण हो सकते हैं।
भोजन के प्रकार और उसे बनाने के तरीके के आधार पर इनमें जीवित सूक्ष्मजीव या उनके घटक भी मौजूद हो सकते हैं। ये आंतों के माइक्रोबायोम और प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ परस्पर क्रिया कर सकते हैं।
मांसपेशियों पर फायदे के पर्याप्त प्रमाण नहींशोधकर्ताओं की समीक्षा में पाया गया कि कुछ प्रोटीनयुक्त किण्वित खाद्य पदार्थ आंतों की सेहत, मेटाबॉलिज्म और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इन बदलावों से मांसपेशियों का आकार या ताकत बढ़ने के पर्याप्त प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।
खासकर मांसपेशियों में नए प्रोटीन बनने की प्रक्रिया पर इन खाद्य पदार्थों के प्रभाव को लेकर बहुत कम अध्ययन हुए हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ये खाद्य पदार्थ आंत – मांसपेशी संबंध के जरिए मांसपेशियों की वृद्धि में विशेष लाभ देते हैं।
आगे और शोध की जरूरतशोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानने के लिए सीधे अध्ययन करने होंगे कि किण्वित भोजन खाने से आंतों और मांसपेशियों में क्या बदलाव होते हैं। इससे यह भी पता चलेगा कि किण्वित खाद्य पदार्थ सामान्य प्रोटीनयुक्त भोजन की तुलना में कोई अतिरिक्त लाभ देते हैं या नहीं।
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