
राम मंदिर चंदा चोरी: बदली सारी व्यवस्था, गणनास्थल से बैंक तक कैमरों का पहरा
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद पूरी व्यवस्था बदल गई है। पहली बार सीईओ की नियुक्ति के साथ गणनास्थल से बैंक तक कैमरों का पहरा है। नकदी बैंक तक ले जाने का रिकॉर्ड दर्ज होगा। चढ़ावे के पैसों का हिसाब अब पूरी तरह डिजिटल है।
राम मंदिर के चढ़ावे में सेंध ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्था का पूरा ढांचा बदल दिया। चार जून की घटना के बाद महज तीन महीने में ट्रस्ट ने व्यक्ति आधारित सिस्टम को पीछे कर तकनीक और संस्थागत निगरानी को केंद्र में ला दिया है। पहली बार सीईओ की नियुक्ति हुई है, चढ़ावे की गिनती पर कैमरों का पहरा बढ़ा है और मंदिर से बैंक तक नकदी का पूरा सफर डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होगा। ट्रस्ट का दावा है कि इन बदलावों के बाद राम मंदिर की व्यवस्था देश के बड़े धार्मिक ट्रस्टों में सबसे अधिक पारदर्शी होगी।
पहली बार सीईओ के हाथ में दैनिक प्रबंधनराम मंदिर के इतिहास में पहली बार सीईओ की नियुक्ति की गई है। सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को सर्वसम्मति से ट्रस्ट का पहला सीईओ चुना गया है। अब तक मंदिर के निर्णय ट्रस्टियों के स्तर पर होते थे, लेकिन अब जिम्मेदारी सीईओ के पास होगी।
पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट में नई नियुक्तियां भी की गई हैं। महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष और गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाया गया है।
चढ़ावे की गणना में बड़ा बदलावदान गिनने वाले कर्मचारियों के लिए जेब-रहित वर्दी अनिवार्य कर दी गई है, ताकि कोई नकदी बाहर न ले जा सके।गिनती केंद्र में एंट्री-एग्जिट पर तलाशी और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी शुरू की गई है।पहले सीसीटीवी फुटेज 45 दिन रखी जाती थी, अब 180 दिन तक सुरक्षित रहेगी।साधारण कैमरों की जगह पीटीजेड कैमरे लगाए गए हैं जो घूमकर और जूम करके निगरानी कर सकेंगे।गणनास्थल की निगरानी के लिए 13 नए कैमरे और 27 अतिरिक्त एसआईएस के सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।अब गिनती स्थल पर कुल 43 अधिकृत लोग ही रहेंगे।
पैसों का हिसाब अब पूरी तरह डिजिटलअब पैसे का हिसाब सीए की निगरानी में और पूरी तरह डिजिटल रखा जाएगा, एक स्थायी सीए की नियुक्ति भी कर दी गई है। नए कोषाध्यक्ष ने भी सीए की नई टीम लगाई है।
सितंबर के अंत तक आएगी एसआईटी की रिपोर्टश्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में गठित नई एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। जेल में बंद आरोपियों से मिले नए नामों का सत्यापन भी तेज कर दिया गया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एसआईटी सितंबर के अंत तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में शासन और सुप्रीम कोर्ट को सौंप देगी।
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