
22-23 अक्तूबर को प्रदेश BJP की नई प्रभारी का पहला औपचारिक संगठनात्मक दौरा
हरियाणा भाजपा में प्रदेश प्रभारी के रूप में स्मृति ईरानी की पहली औपचारिक संगठनात्मक पारी केवल परिचयात्मक बैठकों तक सीमित रहने के बजाय संगठन की सक्रियता और सरकार के कामकाज को समझने का अवसर बन सकती है। 22 और 23 अक्तूबर को पंचकूला में प्रस्तावित उनके दो दिवसीय कार्यक्रम को इसी राजनीतिक नजरिये से देखा जा रहा है। प्रदेश संगठन से लेकर मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों तक के साथ निर्धारित बैठकों के बीच यह सवाल अहम रहेगा कि सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक किस हद तक पहुंच रहा है और संगठन अपने राजनीतिक दायित्वों को कितनी गंभीरता से निभा रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हरियाणा भाजपा की जिम्मेदारी मिलने के बाद यह उनका पहला औपचारिक संगठनात्मक दौरा है। डॉ. सतीश पूनिया के स्थान पर प्रदेश प्रभारी की भूमिका संभालने के बाद उनके सामने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, सरकार की प्राथमिकताओं और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को समझने का अवसर होगा। सह-प्रभारी डॉ. भोला सिंह भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।
राजनीतिक हलकों में इस दौरे को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बैठकों का दायरा केवल प्रदेश पदाधिकारियों या सरकार के मंत्रियों तक सीमित नहीं है। इसमें जिला स्तर के संगठन, पुराने जनप्रतिनिधियों, पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों और बोर्ड-निगमों के चेयरमैन एवं वाइस चेयरमैन को भी शामिल किया गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्रियों, प्रदेश मंत्रिमंडल और पार्टी के सांसदों-विधायकों के साथ संवाद प्रस्तावित है। इस व्यापक संपर्क के जरिए प्रदेश प्रभारी को पार्टी की जमीनी स्थिति और सत्ता-संगठन के आपसी तालमेल का आकलन करने का अवसर मिल सकता है।
मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर भी टिक सकती हैं निगाहें
दो दिवसीय कार्यक्रम का एक संभावित राजनीतिक पहलू प्रदेश सरकार के मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी हो सकता है। हालांकि, अभी तक बैठकों का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है और न ही मंत्रियों के औपचारिक रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा की कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ बैठक को विभागीय प्रदर्शन और जनसंपर्क से जुड़े सवालों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि चर्चा में विभागीय उपलब्धियों और जनहित के कार्यों का आकलन शामिल होता है, तो मंत्रियों की जनता के बीच उपलब्धता, उनके विभागों में पिछले दो वर्षों के दौरान शुरू की गई नई पहलों और मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर हुई प्रगति जैसे विषय स्वाभाविक रूप से प्रासंगिक हो सकते हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विभागों की ओर से किए गए कार्यों का लाभ आम लोगों तक कितना पहुंचा और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।
हरियाणा में भाजपा सरकार के सामने प्रशासनिक कामकाज के साथ राजनीतिक अपेक्षाओं को पूरा करने की चुनौती भी है। जनता के बीच मंत्री की सक्रियता, अपने क्षेत्र और विभाग से जुड़े मुद्दों पर उनकी प्रतिक्रिया तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति किसी भी राजनीतिक समीक्षा के महत्वपूर्ण आधार हो सकते हैं। इसी तरह मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं की प्रगति से यह समझने में मदद मिल सकती है कि सरकारी प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने में विभिन्न विभाग कितने प्रभावी रहे हैं।
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