
नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ ही घंटों बाद भारत की आजादी के 80वें साल की शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने हर नागरिक से देश के लिए जागरूक रहने और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने की अपील की। अपने भाषण में उन्होंने देश की तरक्की, संविधान, विदेश नीति, सरदार पटेल, सिंधु जल संधि और सरकार की कई योजनाओं के बारे में बात की।
राष्ट्रपति ने कहा कि, भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीय स्वतंत्रता दिवस का त्योहार खुशी के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि, हर भारतीय को अपने सपनों को पूरा करने के साथ देश सर्वश्रेष्ठ बनाने में भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए। देश की तरक्की में योगदान देना ही आजादी की असली कीमत है।
उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, मजदूरों और किसानों की मेहनत की तारीफ की। राष्ट्रपति ने कहा कि सभी लोग अपने-अपने काम से देश को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि, हमारा संविधान जनता की भागीदारी पर आधारित है। देश के लोग इस भावना को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र की बड़ी ताकत बताया। राष्ट्रपति ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की भी बात की। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, भारत की विदेश नीति देश के हित को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। आर्थिक सहयोग बढ़ाने और दूसरे देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों में भारत आगे बढ़कर काम कर रहा है। दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा है।
राष्ट्रपति ने पर्यावरण को बचाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि, हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक संसाधनों की कमी का सामना करना पड़े। पर्यावरण की रक्षा करना हमारी परंपरा का हिस्सा है।
राष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल को याद किया। उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ था, तब 550 से ज्यादा रियासतों को भारत से जोड़ना बड़ी चुनौती थी। सरदार पटेल ने इन रियासतों को भारत में मिलाया। राष्ट्रपति ने लौहपुरुष सरदार पटेल को नमन करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार बताया।



