
चेहरे पर पिंपल और दानों की वजह हर बार हॉर्मोनल नहीं, गंदा तकिया भी हो सकता वजह
चेहरे पर आय दिन होने वाले मुहांसों और दानों को ज्यादातर समय हॉर्मोनल बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हर बार इसकी वजह अंदरूनी नहीं होती, कई बार बाहरी कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इन्हीं बाहरी कारणों में से एक कारण है तकिये का गंदा कवर।
तकिये का गंदा कवर मुहांसों और दानों की वजहरात में जब हम सोते हैं तो उस दौरान त्वचा से निकलने वाला सीबम, डेड स्किन और पसीना तकिये के कवर में समाता जाता है। यही वो जरिया होता है जब हमारी चेहरे की त्वचा लंबे समय तक तकिये के संपर्क में आती है। ऐसे में अगर तकिये के कवर को समय-समय पर न बदला जाए तो इससे गंदगी दोबारा स्किन में जाने लगती है। इसके चलते नतीजतन चेहरे पर मुंहासे, एक्ने, खुजली जैसी परेशानी बढ़ने लगती है।
सूती कवर भी स्किन को पहुंचाता है नुकसानतकिये का कवर सूती कपड़े का होने पर भी यह स्किन को नुकसान पहुंचाता है। इसका कड़क और खुरदुरा टेक्स्चर त्वचा पर रगड़ खाता है। एक तो यह त्वचा की प्राकृतिक नमी सोख लेता है, दूसरा इससे लगातार स्किन के फैब्रिक के साथ फ्रिक्शन से स्किन बैरियर डैमेज होता जाता है। इसकी वजह से भी चेहरे पर मुहांसे, दाने और खुजली बढ़ने लगती है।
बचने के उपाय क्या हैं?ऐसे कई टिप्स हैं जिन्हें फॉलो करके बाहरी वजहों से निकलने वाले मुहांसों और दानों को रोका जा सकता है:
स्किन टाइप ऑयली या ड्राई कैसा भी हो, हर 3-4 दिन में तकिये का कवर बदलना मुहांसों से बचने का सबसे आसान तरीका हो सकता है।
सूती कवर की जगह सिल्क या सैटिन कवर तकिये पर यूज में लाएं। इसका चिकना फैब्रिक पसीना कम सोखने के साथ ही स्किन बैरियर की भी सुरक्षा करेगा।
सोने से पहले बालों को हल्का बांधना भी चेहरे पर अतिरिक्त तेल आने से रोक सकता है। इससे बाल सीधे चेहरे पर या तकिये पर ज्यादा नहीं लगेंगे।
रात में हमेशा फेस से मेकअप हटाकर और चेहरे को जेन्टल क्लेंजर से क्लीन करके सोएं ताकि चेहरे की गंदगी तकिये के कवर तक न पहुंचने पाए।
वहीं, कवर को धोने के लिए सबसे पहले पानी हल्का गर्म करें और उसमें डिटर्जेंट डालकर अच्छे से धोएं। अगर आप कॉटन के पिलो का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे भी 2-3 दिन में धोना जरूरी है।
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