शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में प्रधानाचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : केशव मौर्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में उ०प्र० प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेशीय सम्मेलन एवं शैक्षिक उन्नयन विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होकर प्रधानाचार्यों, शिक्षाविदों एवं शिक्षकों को संबोधित किया।nnउपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता, संस्कार एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा देने में प्रधानाचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानाचार्य विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था के केंद्र में होते हैं और उनके नेतृत्व में विद्यार्थियों में ज्ञान, अनुशासन, संस्कार, राष्ट्रभक्ति एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।nnउन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण, तकनीक आधारित एवं रोजगारपरक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे और उसे अपनी प्रतिभा एवं क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।nnमौर्य ने कहा कि सरकार द्वारा विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा, तकनीकी संसाधनों, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं तथा विद्यालयों के कायाकल्प पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश के विद्यालयों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ ही शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।nnउन्होंने कहा कि मिशन कायाकल्प के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, विद्युत व्यवस्था, फर्नीचर, भवनों के रखरखाव एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर किया गया है। इससे विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ एवं बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार हुआ है।nnउपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संस्कार, राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार मानती है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ कौशल, रचनात्मकता, नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।nnउन्होंने प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का आह्वान किया कि वे बदलते समय के अनुरूप नई तकनीक एवं नवाचार को अपनाते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना मजबूत एवं विकसित समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।nnमौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा एवं विकास का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाना और उन्हें विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।nnकार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो० गिरीश चन्द्र त्रिपाठी , पूर्व कुलपति ने की। इस अवसर पर देव कृष्ण शर्मा , मुख्य संरक्षक, प्रधानाचार्य परिषद; डा० हरेन्द्र कुमार राय, प्रदेश अध्यक्ष; डा० वीरेन्द्र प्रताप सिंह, संरक्षक; डा० सुखपाल सिंह तोमर, प्रदेश महामंत्री; डा० राजेश त्रिपाठी, प्रदेश कोषाध्यक्ष; डा० महेन्द्र नाथ राय, कार्यक्रम संयोजक; धर्मेन्द्र मिश्रा, पूर्व कोषाध्यक्ष; उमेश द्विवेदी, MLC; बृजेश कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष; राघवेन्द्र पाण्डेय , प्रदेश उपाध्यक्ष; श्रीमती मधुबाला, प्रदेश उपाध्यक्ष; डा० मदन मोहन शंखधर, महामंत्री संगठन; सतीश कठेरिया; बृजेश कुमार तिवारी, मण्डल अध्यक्ष सहित अन्य प्रतिष्ठितजन एवं प्रधानाचार्यगण की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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