बद्रीनाथ के तप्त कुंड में ज्यादा मत नहाएं !

बद्रीनाथ के तप्त कुंड में ज्यादा मत नहाएं !

11 सितंबर की सुबह बद्रीनाथ मंदिर के पास राजस्थान में रहने वाली दो बहनों की जान चली गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला की उम्र 71 वर्ष और दूसरी महिला की उम्र 63 वर्ष थी और वे आस्था में सराबोर होकर बद्रीनाथ धाम में स्थित तप्त कुंड में 108 डुबकी लगा रही थीं। इस हादसे पर खुद को बद्रीनाथ के पंडे बताने वाली कंटेंट क्रिएटर अपूर्वा ध्यानी ने जानकारी दी कि किसी को भी बद्रीनाथ के तप्त कुंड में 10 से 15 मिनट से ज्यादा का वक्त नहीं बिताना चाहिए। आपको बता दें कि बद्रीनाथ मंदिर में जाने से पहले इसी कुंड में नहाकर खुद को शुद्ध किया जाता है।

वीडियो में कंटेंट क्रिएटर का कहना है कि कुंड के पानी का तापमान 45 से 55 डिग्री सेलियस के बीच होता है। जब यह पानी आपके शरीर पर पड़ता है तो आपकी मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं और आपकी नसें डाइलेट (चौड़ी) हो जाती हैं। इससे आपका रक्तचाप नीचे आ जाता है यानी ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और इससे शरीर रिलैक्स हो जाता है। इस पानी में गंधक (सल्फर) भी है, तो यदि किसी को स्किन एलर्जी होती है तो वो ही ठीक होने की संभावना होती है और पानी के तापमान के कारण शरीर में जो दर्द होते हैं, वो भी ठीक होने की संभावना होती है। इसी कारण लोगों को लोभ आ जाता है कि थोड़ा सा समय और बिता लें।

प्रकृति का खेल

कंटेंट क्रिएटर के मुताबिक, उतने एल्टीट्यूड पर पहले ही ऑक्सीजन कम होती है और वॉटर वेपर पार्टिकल्स, प्योर ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के पार्टिकल्स को डिस्प्लेस कर देते हैं। जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है और यहां पर कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड रिलीज हो रही होती है, वो भी अमोनिया और मीथेन के ट्रेसेस के साथ। यदि इसको लंबे समय तक इनहेल किया जाए तो चक्कर आने लगते हैं।

तेजी से बिगड़ती है स्थिति

क्रिएटर के मुताबिक यह स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ती है और कुछ ही मिनट में जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए आपको ध्यान रखना है कि आपको वहां पर 10 से 15 मिनट ही बिताने हैं, जिसमें आपको कपड़े भी बदलने हैं, कुंड में नहाना भी है, कपड़े बदलकर बाहर भी निकलना है। महिलाओं को बहुत ध्यान देना है, क्योंकि जिस कुंड में वो नहाती हैं, वो चारों ओर से ढका हुआ है।

बहुत गर्म पानी में जाने से काफी सारा खून स्किन के पास मौजूद ब्लड वेसल्स की तरफ चला जाता है, जिससे बीपी गिर जाता है। इसकी वजह से दिल भी तेजी से काम करने लगता है, जिससे दिल पर भी प्रेशर बढ़ता है। गर्म पानी में देर तक बैठने से व्यक्ति का दिल दो तरह के दबाव झेल रहा होता है। बुजुर्ग व्यक्ति, दिल के मरीज या बीपी की दवा लेने वालों के लिए यह स्थिति कार्डियक समस्याओं का कारण बन सकती है। इसके अलावा, शरीर गर्म पानी में तेजी से पसीना बहाता है, जो गीले होने की वजह से हमें दिखता नहीं है। शरीर से निकल रहा है ये फ्लूइड डिहाइड्रेशन और लो बीपी का कारण बनता है। अगर कोई अचानक खड़ा होता है, तो चक्कर आने से गिरने और गिरकर चोट लगने का खतरा बनता है। पानी में बेहोश होने से डूबने का खतरा भी रहता है।

डॉक्टर के मुताबिक, बद्रीनाथ धाम में हाल में हुए हादसे का संबंध ऊंचाई से भी है। 3000 मीटर से भी ज्यादा की ऊंचाई पर ऑक्सीजन कम होती है तो दिल पहले से दबाव झेल रहा होता है। जब आप थके, कम नींद लिए, डिहाइड्रेटेड होकर गर्म पानी में ज्यादा देर तक रहते हैं तो दिल पर और ज्यादा प्रेशर पड़ता है।
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