
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) एक बार फिर छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं। दिल्ली में विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों की भूख हड़ताल से शुरू हुए आंदोलन के बीच उनका एक बयान चर्चा में है। एक्टर ने शिक्षा संस्थानों, युवाओं की आवाज और लोकतंत्र को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी वह कोलकाता में छात्रों के समर्थन में अपनी बात रख चुके हैं।
नसीरुद्दीन शाह ने अपने बयान में कहा कि उन्हें सरकार की ओर से अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इनमें ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्द भी शामिल हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह खुद को गर्व के साथ ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं। अभिनेता का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब छात्र आंदोलन और शिक्षा संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर बहस जारी है। उनके शब्दों में सरकार की नीतियों और आलोचकों के प्रति उसके रवैये पर नाराजगी साफ नजर आती है।
शिक्षा और लोकतंत्र को लेकर उठाए सवाल
नसीरुद्दीन शाह ने अपने बयान में सरकार पर आरोप लगाया कि उसके फैसलों से युवाओं के मनोबल, शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार छात्रों की आवाज को दबाने और शिक्षा संस्थानों को प्रभावित करने के लिए कितनी दूर तक जाएगी।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और जामिया मिलिया इस्लामिया का जिक्र करते हुए छात्रों के साथ कथित व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
युवाओं के हौसले पर जताया भरोसा
अपने संदेश में अभिनेता ने कहा कि सरकार चाहे जितनी ताकत लगा ले, युवाओं का हौसला आसानी से नहीं टूटेगा। उन्होंने शिक्षा संस्थानों और लोकतंत्र को लेकर भी भरोसा जताया।
नसीरुद्दीन शाह का यह बयान छात्रों के आंदोलन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर नई चर्चा को जन्म दे सकता है। हालांकि, उनके आरोपों और संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी और अन्य विश्वसनीय स्रोतों को देखना जरूरी है।



