
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के जरिए चुनावी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। इस बैठक में करीब 2,850 नेताओं और पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य संगठन को चुनावी मोड में लाना और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना है।
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, केंद्र व प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा 2022 और 2024 के चुनावों में भाजपा के टिकट पर उतरे प्रत्याशियों तथा जिला स्तर के पदाधिकारियों को भी बुलाया गया है।
अमित शाह देंगे चुनावी रणनीति का मंत्र
बैठक में अमित शाह मुख्य वक्ता होंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समापन सत्र को संबोधित करेंगे। चर्चा के केंद्र में बूथ प्रबंधन, सामाजिक समीकरण और संगठन की मजबूती रहने की उम्मीद है। पार्टी 2014, 2017 और 2019 के चुनावी अनुभवों के आधार पर अपनी रणनीति को धार देने की तैयारी में है। साथ ही बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और उनकी जिम्मेदारियां तय करने पर भी जोर रहेगा।
2027 में सत्ता बरकरार रखने की चुनौती
2017 में बड़ी जीत के बाद भाजपा ने 2022 में भी उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की थी, हालांकि उसकी सीटें पहले के मुकाबले कम हुई थीं। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के बेहतर प्रदर्शन ने प्रदेश की सियासत में नए समीकरण सामने रखे।
ऐसे में भाजपा के सामने 2027 में सरकार बरकरार रखने के साथ संगठन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की चुनौती है। लखनऊ की प्रदेश कार्यसमिति बैठक को इसी चुनावी तैयारी की अहम कड़ी माना जा रहा है।



