मंचन: जिंदगी की जद्दोजहद में एक सपने की मौत

लखनऊ। अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने बीएम शाह प्रेक्षागृह बीएनए परिसर में मध्यमवर्गीय परिवार के संघर्ष को दर्शाते नाटक एक सपने की मौत का प्रभावशाली मंचन किया। प्रसिद्ध लेखक आर्थर मिलर की बेहद लोकप्रिय कालजयी रचना डेथ ऑफ ए सेल्समैन का जितेन्द्र कौशल ने हिन्दी रुपांतरण किया है।

नाटक के मुख्य पात्र रामदास कपूर उनकी पत्नी सावित्री और उनके दो बेटे बन्नू व हर्षि पर केन्द्रित है। रामदास कपूर मेहनती सेल्समैन हैं मगर 50 की उम्र तक पहुंचते उनकी क्षमताएं कम होने लगती हैं। रामदास अपने दोनों बेटों के बेहतर भविष्य का सपना देखता है, उसका बड़ा भाई बलवंत कई साल पहले अफ्रीका चला गया, वहां उसका खासा कारोबार है। बलवंत रामदास को अपने साथ अफ्रीका चलने को कहता है मगर वह अस्वीकार कर देता है। इधर ठीक ठाक बिजनेस न दे पाने पर गुलाब हिंगोरानी रामदास को नौकरी से निकाल देता है।

अपनी बीमे की प्रीमियम भरने के लिए रामदास को अपने मित्र चरणदास से मदद लेनी पड़ती है। चरणदास का बेटा सूरज बन्नू का दोस्त है, सूरज खूब तरक्की करता है जबकि बन्नू पिछड़ चुका है। यह सारी बातें रामदास को हमेशा परेशान करती है। आखिर में कोई रास्ता न सूझने पर रामदास अपने बीमे के 50 हजार रूपये हासिल कर उस रकम से बन्नू को अपना खुद का कोई काम शुरू करने में मदद की योजना बनाता है। कार एक्सीडेंट में उनकी मौत के साथ नाटक का पटाक्षेप होता है।

Gyan Dairy

रामदास कपूर की भूमिका में महेन्द्र धुरिया व सावित्री अंकिता शुक्ला का अभिनय सहज और स्वाभाविक था। तुषार व शिवेन्द्र त्रिवेदी (बन्नू कपूर), कुशल गुप्ता व साहिल चक (हर्षि ), सुरेश श्रीवास्तव (चरणदास अरोड़ा), अमरदीप/ आकाश (सूरज), सुमित गुप्ता (अर्जुन हिंगोरानी), प्रमोद शर्मा (बलवंत कपूर), आरती शुक्ला, शुभी (सोनिया), दिलीप सिंह (कुंदन), शिवी, नरेन्द्र सिंह व आकाश शर्मा ने भी नाटक में भूमिका निभायी। प्रकाश परिकल्पना, निर्देशन कृष्णा सक्सेना, कास्ट्यूम दीपिका सिंह, प्रस्तुति समन्वयक निशा वर्मा, मंच व्यवस्था विजय भास्कर, रूपसज्जा अनिल निगम ने की। नाटक के एसोसिएट निर्देशक एवं संगीतकार डा. ओमेन्द्र कुमार थे।

Share