रक्षाबंधन में बहने भाईयों की कलाई पर क्यों बांधती हैं राखी और माथे पर लगाती हैं ​तिलक?

हिंदू धर्म में रक्षा बंधन को भाई बहन के प्रेम का एक बंधन माना जाता है और इसीलिए बहने अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र के रूप में राखी बांधती हैं, कहते हैं कि ये राखी भाईयों की मुसीबत के वक्त रक्षा करती है। इस पर्व पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर कलाई पर राखी बांधती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर राखी पर क्यों भाई के माथे पर अक्षत और कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। राखी पर तिलक का शुभ महत्व होता है। कहा जाता है कि तिलक लगाते वक्त माथे के बीच में दवाब देना चाहिए। यह स्थान छठी इंद्री का माना गया है। वैज्ञानिकों के तर्क के अनुसार, दवाब देने से स्मरण शक्ति के साथ निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।

शास्त्रों के मुताबिक, लाल चंदन, श्वेत चंदन, कुमकुम और भस्म का तिलक शुभ माना गया है। वहीं रक्षा बंधन पर कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। कुमकुम के तिलक के साथ अक्षत (चावल) भी इस्तेमाल किया जाता है। तिलक को माथे के बीच में लगाया जाता है। यह तिलक विजय, मान-सम्मान और जीत का प्रतीक माना जाता है।

तो इसलिए कुमकुम के साथ लगाते हैं अक्षत

शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, चावल शुद्ध अन्न है। इसे हवन में देवताओं को भी अर्पित किया जाता है। कहा जाता है कि कच्चे चावल का तिलक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है और आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।

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ऊर्जा का संचार

भौहों के बीच जहां तिलक लगाया जाता है, उस स्थान को अग्नि चक्र कहते हैं। कहा जाता है कि यहीं से पूरे शरीर में शक्ति का संचार होता है। ऐसे में यहां तिलक लगाने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है।

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