टैक्स फ्री, सिर्फ 12 लाख रुपये को कैसे बनाएं 2.38 करोड़ रुपये

ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाने का सपना हम सभी ने कभी न कभी ज़रूर देखा होगा, लेकिन सपने तो सपने ही होते हैं. असल ज़िन्दगी में ऐसा कोई तरीका नहीं होता, जिसमें कुछ हज़ार रुपये का निवेश हमें करोड़ों रुपये का रिटर्न दे सके और हां, अगर कुछ ऐसा होगा भी, तो हाथ आने वाले करोड़ों रुपये पर टैक्स देना पड़ेगा, और रकम फिर कम रह जाएगी. लेकिन अब हम आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जिसके ज़रिये कुछ हज़ार रुपये मासिक का निवेश कर आप कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये की टैक्स फ्री कमाई कर सकते हैं.

वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, इन म्यूचुअल इक्विटी फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप – SIP) के ज़रिये लम्बे समय तक निवेश करते रहने से आप अच्छी कमाई कर सकते हैं, जिस पर सरकार कोई टैक्स नहीं लेती है, अगर आप एक साल तक इसमें से कोई रकम नहीं निकालते हैं. मौजूदा माहौल में, जब बैंकों में सभी तरह की ब्याज़ दरें, यानी बचत खाता (सेविंग्स एकाउंट), सावधि जमा खाता (एफडी), आवर्ती जमा खाता (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज की दरें लगातार कम होती जा रही हैं, सिप (SIP) के ज़रिये डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड में निवेश बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि एक साल के बाद म्यूचुअल इक्विटी फंड से होने वाली आय करमुक्त, यानी टैक्स फ्री होती है.

जी हां, आपने सही पढ़ा. जिस योजना की बात हम कर रहे हैं, वह है म्यूचुअल इक्विटी फंड, जिसमें 20 साल तक सिर्फ 5,000 रुपये मासिक (यानी कुल 12 लाख रुपये) का निवेश करने से भी आप हासिल कर सकते हैं 2.38 करोड़ रुपये, जिस पर आपको एक पैसा भी टैक्स के रूप में नहीं देना होगा. हम जानते हैं, इस बात पर यकीन करना आपके लिए आसान नहीं है, लेकिन देश में कुछ म्यूचुअल इक्विटी फंड ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले 20 साल के दौरान बिल्कुल इसी तरह का रिटर्न अपने ग्राहकों को दिया है.

अब आपको बताते हैं कि हमने यह किस आधार पर कहा कि आपकी कमाई 2.38 करोड़ रुपये तक हो सकती है. आज हम आपको ऐसे पांच म्यूचुअल इक्विटी फंडों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने पिछले 20 या उससे भी ज़्यादा सालों में लगातार 20 फीसदी से ज़्यादा सीएजीआर (कम्पाउंड एनुअल ग्रोथ रेट या चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) रिटर्न दिया.

पिछले 20 साल के दौरान रिटर्न के हिसाब से दूसरे नंबर पर है ‘रिलायंस ग्रोथ फंड’. अगर आपने 1 अप्रैल, 1998 को इस फंड में 5,000 रुपये मासिक का निवेश करना शुरू किया होता, तो 1 अप्रैल, 2017 को 2.12 करोड़ रुपये का रिटर्न आपको मिल चुका होता, यानी निवेश की गई मूल राशि का 17.66 गुना.

दिसंबर, 1993 में शुरू होने के बाद से अब तक ‘फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा फंड’ का सीएजीआर 21.02 फीसदी रहा है, और अप्रैल 1998 से अब तक तो यह रिटर्न 25.11 फीसदी रहा, यानी अगर आपने इस म्यूचुअल फंड में 1 अप्रैल, 1998 को 5,000 रुपये माहवार के हिसाब से निवेश किया होता, तो 1 अप्रैल, 2017 को आपके खाते में 2.38 करोड़ रुपये जमा होते, जिन पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता.

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तीसरे नंबर पर है ‘एचडीएफसी इक्विटी फंड’, पिछले 20 साल में जिसका सीएजीआर 23.56 प्रतिशत रहा है. यानी अगर आपने 1 अप्रैल, 1998 से इस फंड में सिप के ज़रिये 5,000 रुपये माहवार का निवेश करना शुरू किया होता, तो 1 अप्रैल, 2017 को आपके खाते में 1.95 करोड़ रुपये पड़े होते.

देश में रिटर्न के मामले में पांचवें नंबर पर है ‘एचडीएफसी टॉप 200 फंड’, जिसका सीएजीआर रिटर्न शुरुआत से अब तक 20.88 फीसदी रहा है, और अगर इस फंड में ठीक 20 साल पहले आपने 5,000 रुपये मासिक का निवेश करना शुरू किया होता, तो आज आपका फंड 1.43 करोड़ रुपये का होता.

इसके बाद आता है ‘रिलायंस विज़न फंड’, जिसका सीएजीआर रिटर्न पिछले 20 वर्ष के दौरान 19.92 फीसदी रहा है. इस म्यूचुअल इक्विटी फंड में अगर आप 20 साल पहले 5,000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से निवेश करना शुरू करते, तो इसी महीने की पहली तारीख को आपके खाते में 1.46 करोड़ रुपये जमा होते.

सो, वैसे तो निवेश के लिए कोई भी उम्र बड़ी नहीं होती, लेकिन फिर भी अगर आपकी आयु 40 साल और आसपास है, तो रिटायरमेंट के बाद की प्लानिंग करने के लिए इससे बेहतर विकल्प फिलहाल नहीं हो सकता, क्योंकि इस योजना में आपकी मूल रकम न सिर्फ 20 गुना तक बढ़ सकती है, बल्कि उस रकम पर आपको कोई टैक्स भी नहीं देना होगा.

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