रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 192 अरब के जुर्माने मामले में केंद्र को दी चुनौती

केंद्र सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से पन्ना, मुक्ता और ताप्ती (पीएमटी) फील्ड्स कॉन्ट्रैक्टर्स के मामले में 192 अरब डॉलर के जुर्माने की मांग की थी। लेकिन रिलायंस ने अब सरकार की इस मांग को चुनौती दी है।

आरआईएल तथा शेल ने पिछले नवंबर में ब्रिटेन की एक अदालत में तीन सदस्यीय मध्यस्थ के समक्ष चुनौती दी थी। सिंगापुर के वकील क्रिस्टोफर लऊ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार के इस विचार को बरकरार रखा कि तेल एवं गैस फील्ड से लाभ का आकलन मौजूदा 33 प्रतिशत कर काटे जाने के बाद किया जाना चाहिए न कि पूर्व की 50 प्रतिशत दर के आधार पर।

गौरतलब है कि केंद्र ने आर्बिट्रेशन पैनल के फैसले के आधार पर यह जुर्माना माँगा था। रिलायंस ने दलील दी है कि आर्बिट्रेशन ट्राइब्यूनल में ‘क्वॉन्टिफिकेशन स्टेज’ में नहीं पहुंचा है, इसलिए जुर्माना अभी नहीं मांगा जा सकता।

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मध्यस्थता अदालत ने यह भी कहा है कि परियोजना के अनुबंध में ताप्ती गैस फील्ड के लिए 54.5 करोड़ डालर तथा पन्ना-मुक्ता तेल एवं गैस फील्ड के लिए बिक्री आय से 57.75 करोड़ डालर की लागत निकालने की बात तय नियत है।

दोनों कंपनियां चाहती थीं कि उन्हें इन परियोजनाओं में क्रमश: 36.5 करोड़ डालर और 6.25 करोड़ डालर की अतिरिक्त लागत की निकासी की छूट हो।

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