इरफान खान के लिए पिता कहते थे- पठान के परिवार में ब्राह्मण पैदा हुआ है, जानिए वजह

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान (Irrfan Khan) ने अपने दम पर सिनेमा में खुद की एक अलग पहचान बनाई। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपने अभिनय की छाप छोड़ने वाले इरफान सुपरस्टारडम हासिल करने में कामयाब रहे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी इरफान लीक से हटकर चलने वाले लोगों में से हैं। शायद यही कारण है कि वे पठान परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद शुद्ध शाकाहारी हैं।  

पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था

इरफान का पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था। उनका जन्म एक पठान मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जागीरदार खान था, जो टायर का व्यापार करते थे। इरफान ने पठान मुस्लिम परिवार में जन्म होने के बाद भी कभी मीट या मांस नहीं खाया था और वे बचपन से ही शाकाहारी थे। इसी वजह से उनके पिता इरफान को मजाक में कहा करते थे कि ये तो पठान परिवार में एक ब्राह्मण पैदा हो गया है।

जानवरों का शिकार करना पसंद नहीं था

रिपोर्ट्स की मानें तो इरफान के पिता उन्हें शिकार पर भी ले जाया करते थे। जंगल का वातावरण उन्हें काफी पसंद था, लेकिन उन्हें कभी मासूम जानवरों का शिकार करना पसंद नहीं आया। इरफान उन जानवरों के साथ जुड़ाव महसूस करते थे कि आखिर अब इन जानवरों के परिवारों का क्या होगा। इरफान खुद भी राइफल चलाना जानते थे लेकिन कभी शिकार नहीं करते थे।

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फेलोशिप के जरिए अपना कोर्स खत्म किया

गौरतलब है कि एनएसडी में इरफान के एडमिशन के कुछ समय बाद उनके पिता का निधन हो गया था और घर की तरफ से मिलने वाले पैसे उन्हें मिलना बंद हो गया थे। एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप के जरिए उन्होंने अपना कोर्स खत्म किया था। उस मुश्किल दौर में इरफान की क्लासमेट सुतापा सिकंदर ने उनका पूरा साथ दिया। 23 फरवरी 1995 में दोनों ने शादी रचा ली थी। इरफान ने पीकू, लाइफ ऑफ पाई, द नेमसेक, स्लमडॉग मिलेनियर, पान सिंह तोमर, हासिल, लाइफ इन अ मेट्रो, तलवार, मकबूल, ये साली जिंदगी, हैदर जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया है।  

अंग्रेजी मीडियम है आखिरी फिल्म

बॉलीवुड के टैलेंटेड अभिनाताओं में शामिल इरफान खान के यूं अचानक चले जाने से उनके फैंस और बॉलीवुड सेलेब्स सदमे में हैं। दो साल पहले मार्च 2018 में इरफान को न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी का पता चला था। विदेश से इस बीमारी का इलाज कराकर इरफान खान ठीक हो गए थे। इसके बाद वह भारत लौटे और अंग्रेजी मीडियम में काम किया। ये फिल्म इरफान की जिंदगी की आखिरी फिल्म है।

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