डिप्रेशन से हैं परेशान तो अपनाएं ये आसान उपाय

नई दिल्ली। अवसाद या डिप्रेशन का इलाज अगर प्राथमिक स्टेज पर कर लिया जाए तो आसानी से बचा जा सकता है अमूमन परिवार में अचानक किसी की मृत्यु हो जाए, बिज़नेस में बहुत बड़ा नुकसान होने पर, शादी टूट जाए… ऐसी कोई भी बात या घटना, जिसे आप चाहकर भी भूल नहीं पाते या जिसे सहन करना आपके लिए मुश्किल हो जाए, छह महीने बाद भी आप उस चीज़ को भूल न पाएं और आपका किसी चीज़ में मन न लगे, तो समझ जाइए कि ये डिप्रेशन है।

डिप्रेशन की शुरुआत में चीज़ों में रुचि कम होने लगती है। पीड़ित व्यक्ति समाज से कटने लगता है। घर से बाहर नहीं निकलना चाहता। उसका किसी काम में मन नहीं लगता, नींद बहुत ज़्यादा आती है। भूख बिल्कुल नहीं लगती। ये स्थिति छह महीने बाद भी नहीं बदलती, तो मन में आत्महत्या के ख़्याल आने लगते हैं, जीने की रूचि ख़त्म होने लगती है। यही स्थित अवसाद की मानी जाती है।

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डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए सबसे ज़रूरी है अपनों का साथ, जिनके साथ आप अपने मन की हर बात शेयर कर सकें। इसलिए अपने करीबी दोस्त या घर के करीबी सदस्य से अपने मन की बात शेयर करें। साथ ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें। नियमित योग, ध्यान, सही आहार, पूरी नींद आदि से आप डिप्रेशन से बाहर निकल सकते हैं। यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

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