नाभि की रखेंगे देखभाल तो पूरा शरीर रहेगा स्वस्थ, जानें कैसे

नई दिल्ली। मानव शरीर का केन्द्र बिंदु नाभि को माना जाता है। मनुष्य की उत्पत्ति गर्भ में नाभी के पीछे होती है। माना जाता है कि पेट में बच्चे को मां के साथ जुड़ी हुई नाड़ी से पोषण मिलता है। शायद इसलिए ही मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।

नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है। जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है। नाभि में देशी गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।

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सोने से पहले 3 से 7 बूंदे शुध्द देशी गाय का घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ़ ईंच गोलाई में फैला दें।

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सोने से पहले तीन से सात बूंद अरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ़ ईंच में फैला दें। रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके चारों ओर डेढ़ ईंच में फैला दें।

हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है। जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हींग और पानी या तेल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।

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