गिलोय ही नहीं उसके पत्ते भी हैं लाजवाब, जानें फायदे

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के दौर में लोगों को गिलोय के गुणों के बारे में पता चल ही गया है। लेकिन आज हम आपको गिलोय के पत्तों के बारे में बताएंगे। गिलोय की तरह उसके पत्ते भी अपने औषधीय गुणों के चलते आयुर्वेद में अलग पहचान रखते हैं। गिलोय जो नीम पर चढ़ी हो वह अत्यंत ही श्रेष्ठ मानी जाती है।

आप सुबह खाली पेट गिलोय के दो पत्तें मुंह में रखें और उनको दांतों से हल्का सा कुचल कर उसके रस में पुरे मुंह में पान की भाँती से फैला कर रखें। इसका रस आपको कुछ चिकना जैसा महसूस होगा। अब आप इस गिलोय को पान की तरह से बीस मिनट तक मुंह में इधर उधर करते रहें और समय समय उसे दांतों से फिर से कुचलते रहें,और उसके रस को मुंह में फैलाते रहें। ऐसा आपको लगभग बीस मिनट तक करना है। आप एक से दो दिनों के भीतर ही पायेंगे की आपके मुख से सबंधित संक्रमण में लाभ मिलने लगा है। वैद्य की सलाह के उपरान्त इसे जरुर आजमायें। आप चाहें तो खदिरादीवटी को भी मुंह में चूंस सकते हैं लेकिन निश्चित ही गिलोय के पत्तों से शीघ्र लाभ प्राप्त होगा, ऐसे चमत्कारिक हैं गिलोय के पत्ते।

मुंह के अन्दर यदि कोई इन्फेक्शन हो गया है, मसूड़ों में यदि कोई संक्रमण हो गया है तो आप वैद्य की सलाह के उपरान्त इस उपाय को भी जरुर आजमायें।

Gyan Dairy

खून की कमी (एनीमिया) हो जाने पर भी गिलोय के पत्तों का सेवन लाभकारी माना जाता है।
पीलिया रोग में भी पारम्परिक रूप से गिलोय के पत्तों का रस दिया जाता है।
तीव्र बुखार हो जाने पर गिलोय के पत्तों का रस से बना क्वाथ पीने से लाभ मिलता है।
इसके अतिरित्क्त गिलोय के तने, जड़ आदि से भी बहुत ही अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं और इसीलिए इसे ‘अमृता’ नाम से जाना जाता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और इसमें एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल प्रोपर्टीज भी होती हैं

Share