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लॉकडाउन में बढ़ गया है मोटापा, इन आसनों से चंद दिनों में होंगे स्लिम

लॉकडाउन में बढ़ गया है मोटापा, इन आसनों से चंद दिनों में होंगे स्लिम
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नई दिल्ली। लॉकडाउन में लगातार खाते-पीते रहने से कई लोगों को मोटापे की समस्या से जूझना पड़ रहा है। तमाम वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि मोटापे से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है जो कोरोना से लड़ाईर् में आपको कमजोर बनाती है। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं ताड़ासन और त्रिकोणासन के बारे में, इससे न सिर्फ पेट की चर्बी कम होगी बल्कि आप चुस्त भी महसूस करेंगे।

जिन लोगों का रक्तचाप कम हो या घुटनों में तेज दर्द हो रहा तो उन्हें ताड़ासन नहीं करना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिलाओं को इससे परहेज करना चाहिए। त्रिकोणासन वे लोग कतई न करें जिनका रक्तचाप कम या अधिक होता रहता हो। जिन्हें कमर में तेज दर्द या फिर स्लिप डिस्क की समस्या है,वो भी इससे बचें।

ताड़ासन-
सीधा खड़े हो जाएं और अपनी टांगों, कमर व गर्दन को सीधा रखें। हाथों की उंगुलियों को आपस में फंसाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं और गहरी सांस भरते हुए पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें। हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए। अब एड़यिों को ऊपर की ओर उठाएं और शरीर का पूरा भार पंजों पर आने दें। करीब 20 सेकेंड तक इसी अवस्था में रहें और सामान्य गति से सांस लेते व छोड़ते रहें। फिर धीरे-धीरे पहली वाली स्थिति में आ जाएं। रोजाना चार से पांच बार आप ये आसन कर सकते हैं।

लाभ: इससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम होगी और शरीर सुडौल व आकर्षक बनेगा। किशोरों और युवाओं को यह आसन जरूर करना चाहिए क्योंकि इससे कद बढ़ाने में भी मदद मिलती है। साथ ही पीठ दर्द, मांसपेशियों, घुटनों व पैरों में होने वाले दर्द से भी आराम मिलता है।

त्रिकोणासन-
दोनों पैरों के बीच दो फुट की दूरी बनाकर खड़े हो जाएं। बांहों को कंधे तक फैलाएं और सांस लेते हुए दाएं हाथ को ऊपर ले जाते हुए कान से सटा लें। धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए कमर से बाईं ओर झुकें। दायां हाथ कान से सटा रहना चाहिए। अब दाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाएं और बाएं हाथ से बाएं टखने को छूने का प्रयास करें। करीब 10-30 सेकंड इसी मुद्रा में रहें और सांस लेते रहें। फिर सांस लेते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं। अब यही प्रक्रिया दूसरी ओर से भी अपनाएं।

लाभ: पेट और कमर की चर्बी कम करने में यह सबसे असरदार योगासन है। शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है तो वहीं फेफड़े भी स्वस्थ होते हैं और बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं।

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