तनाव, अवसाद से रहना है दूर तो अपनायें आयुर्वेद

नई दिल्ली। आजकल के युवाओं में तनाव, अवसाद, आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। कोरोना की वजह से भी लोगों में यह प्रवृत्ति देखी गयी। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान खुुद कहीं बहुत पीछे होता जा रहा है। वह सब कुुछ होते हुए भी खुद को अकेला मानता है और अवसाद का शिकार हो जाता है। लेकिन इन सभी परेशानियों का भी हल आयुर्वेद में हैं। योग की मदद से व्यक्ति तनाव को नियंत्रित कर सकता है। योग से मन भी शांत होता है। वैज्ञानिक रूप से योग (गामा-एमिनो ब्यूटिरिक एसिड), सेरोटोनिन, डोपामाइन और ट्रिप्टोफैन जैसे खुश न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बढ़ाता है और कोर्टिसोल स्तर (तनाव हार्मोन) को कम करता है।

सात्विक आहार जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे, बीज, शहद, ताजी जड़ी-बूटियां, दूध, डेयरी उत्पाद के सेवन से व्यक्ति के चेतना बढ़ती है। इस तरह के आहार को ग्रहण करने वाला व्यक्ति शांत और ऊर्जा से भरा होता है। आयुर्वेद में रोजाना अभ्यंग (तेल मालिश) का अनुष्ठान बताया गया है। जिसकी वजह से व्यक्ति शारीरिक और भावनात्मक रूप से सेहतमंद बना रहता है। कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां मस्तिष्क की क्षमताओं को बेहतर बनाने का काम करती हैं। इन जड़ी बूटियों को व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के जीवन में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा जटामांसी, मंडुकपर्णी, शंखपुष्पी आदि भी कोर्टिसोल के स्तर और तनाव को कम करती है।

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