रोज 37 किलो खाना खा जाता था गुजरात का यह बादशाह, डाइट में जहर भी था शामिल

नई दिल्ली। हर दौर में खाने पीने के शौकीन रहे हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे रहे जिनकी खाने की आदत ने उन्हें इतिहास में प्रसिद्ध कर दिया। ऐसे ही पराक्रमी योद्धा थे गुजरात के बादशाह महमूद बेगड़ा। यह सुल्तान अपने पेटू होने के कारण भी ज्यादा प्रसिद्ध था।

बादशाह महमूद बेगड़ा ने 13 साल की उम्र से 53 साल तक शासन किया, उन दिनों किसी भी राजा अथवा सुल्तान के लिए एक प्रकार से यह लंबा कार्यकाल था। सुल्तान महमूद बेगड़ा हष्टपुष्ट शरीर का मलिक थे, उनकी दाढ़ी कमर तक पहुंचती थी। उनकी मूंछें भी काफी लंबी थी। इस स्टोरी में हम आपको महमूद बेगड़ा के खाने के मशहूर किस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं।

यूरोपीय इतिहासकार बारबोसा और वर्थेमा के मुताबिक सुल्तान को एक बार जहर देने की कोशिश की गई थी, तब से सुल्तान रोज को थोड़ी मात्रा में जहर दिया जाता रहा था ताकि उनका इम्यून सिस्टम जहर का आदी हो जाए।

कौन थे बादशाह महमूद बेगड़ा
महमूद बेगड़ा गुजरात के छठे सुल्तान थे। महज तेरह वर्ष की उम्र में वे गद्दी पर बैठे और 52 वर्ष की आयु तक उन्होंने सफलतापूर्वक राज किया। यानि कि 1459-1511 ईसवी तक उनका शासनकाल रहा। महमूद बेगड़ा अपने वंश के सबसे प्रतापी और वीर शासकों में से एक थे। ‘गिरनार’ जूनागढ़ तथा चम्पानेर के किलों को जीतने के बाद उन्हें ‘बेगड़ा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। एक पराक्रमी योद्धा के रुप में वे अपने शासनकाल में मशहूर थे और इसके साथ ही साथ अपने खान-पान के लिए वे चर्चित थे। उनका व्यक्तित्व काफी आर्कषक था। वे हट्टे-कट्टे थे। उनकी मूंछे भी काफी लम्बी थी जिन्हें वे सर के पीछे बांधकर रखते थे। वे एक बार में इतना ज्यादा खाना खाते थे जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते थे और ऐसा वे हर रोज करते थे।

क्या खाते थे
सुबह के नाश्ते में बादशाह एक कटोरा शहद, एक कटोरा मक्खन और सौ से डेढ़ सौ तक केले आराम से खा जाते थे। जी हां, कुछ ऐसा ही था उनका ब्रेकफास्ट। फारसी और यूरोपीय इतिहासकारों ने अपनी कुछ कहानियों में इस बात का उल्लेख भी किया है कि वे हर रोज लगभग एक गुजराती टीले जितना खाना खा जाते थे। दोपहर के भरपेट आहार के बाद बादशाह को मीठा खाने का शौक था। हर रोज डिर्सट में बादशाह 4.6 किलो मिट्ठे चावल खा जाते थे।

Gyan Dairy

रात के खाने का शाही इंतजाम
दिनभर इतना खाने के बाद और रात में भरपेट डिनर के बाद भी बादशाह का मन नहीं भरता था। रात को अचानक भूख लग जाने के डर से सुल्तान को परेशानी का सामना ना करना पड़े इस वजह से उनके तकिए के दोनो तरफ गोश्त के समोसों से तश्तरियाँ रखी जाती थी। जिससे सुल्तान रात की भूख को शांत कर सकते थे।

खाने के बाद का मीठा

खाने के बाद सुल्तान महमूद बेगड़ा 4.6 किलो मीठे चावल खा जाते थे ।

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