इस उम्र में महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का होता है बड़ा खतरा, समय से जान लें लक्षण

नई दिल्ली। बदलती हुई लाइफ स्टाइल और अनियंत्रित खानपान से मौजूदा समय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी का खतरा बढ़ता जा रहा है। 25 से 40 साल की महिलाओं में इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरुकता नहीं है शायद यहीं कारण है कि आज भी 60 फीसदी मरीज नहीं जान पाते है कि वह इस बीमारी से ग्रस्त हो चुके है। उन्हें इस बीमारी के बारे में तब पता लगता है जब वह 3 या 4 स्टेज में पहुंच कर एक खतरनाक बीमारी का रुप ले चुका होता है।
ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि सप्ताह में एक बार नहाते समय स्तन की अच्छी तरह से जांच करें।

इन चीजों का रखें ख्याल
पीरियड्स के बाद ब्रेस्ट या अंडरआर्म में गांठ होना। स्तन में दर्द, खुजली, या उसका लाल होना भी इस बीमारी का कारण हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर आपको तुंरत डॉक्टर से सलाह लेकर अल्ट्रासाउंड या एमआरआई करवानी चाहिए। कैंसर की कोशिकाएं बढ़ने के कारण अंडरआर्म्स में दर्द, सूजन और गांठ पड़ने जैसी परेशानियां भी होती हैं। कई बार ब्रेस्ट कैंसर के दौरान कैंसर की कोशिकाएं जब बढ़ने लगती हैं तो यह रीढ़ की हड्डी पर असर डालता है जिससे गर्दन में तेज दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है। स्तन के निप्पल में से हल्का पानी जैसा डिस्चार्ज होना भी ब्रेस्ट कैंसर का संकेत होता है। इसके अलावा निप्पल का रंग और आकार बदलने पर तुरंत चेकअप करवाएं। ब्रेस्ट कैंसर होने पर महिलाओं को हमेशा थकान महसूस होती है। कैंसर के सैल्स रक्त की कोशिकाओं पर दबाव डालते हैं जिससे शरीर अत्यधिक थकान महसूस करता है।

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ब्रेस्ट कैंसर होने के कारण
लड़कियों में 12 साल की उम्र से पहले ही पीरियड्स आना से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। 30 साल की उम्र के बाद प्रैग्नेंट होने पर भी कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। अधिक मात्रा में बर्थ कंट्रोल पिल्स का सेवन भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ा देता है। अगर आपको पीरियड्स 55 की उम्र के बाद ही बंद हो गए है तो आपको यह बीमारी हो सकती है।

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