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राजपाल यादव जीवनी (बायोग्राफी) – राजपाल यादव के बारे में कुछ विशेष रोचक जानकारियां

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Rajpal Yadav Biography In Hindi : राजपाल यादव

उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर (Shahjahanpur) से 40 किलोमीटर दूर कुंद्रा गाँव में 16 मार्च 1971 जन्मे और फिर आठवी कक्षा तक की Education प्राप्त की Shahjahanpur से ही, और उसके पश्चात शाहजहांपुर से स्नातिक की डिग्री (Degree) प्राप्त की और लखनऊ की और बढ़ चले. लखनऊ से BNA तक की पढाई और फिर दिल्ली से National School Of Drama (NSD) और यहाँ से मुंबई तक की यात्रा यानी बचपन से जवानी तक का सफ़र ये था पर किया बचपन की बीतीं बातें कोई भुला पाता है?

Early Life (Career) : प्रारंभिक जीवन

इंसान से इंसान का अपना परिचय धीरे-धीरे ही होता है, अपनी कमियों और अपने गुण मालुम होने लगते हैं, और फिर हम चयन करते हैं की हमें किस और पाँव बढ़ाना है. ये परिचय स्कूल (School) से कॉलेज तक की सफ़र में होजाता है. Rajpal जी का परिचय अपने भीतर निहत्य कलाकार या उस अभिनेता से कब हुआ आईये चलिए कुछ रोचक बातें जानते हैं जो Rajpal जी ने एक बार खुद एक इंटरव्यू  (Interview) में बताया था.

Rajpal Yadav जी बचपन में कई बार स्कूलों में भी नाटक में हिस्सा लेते रहेते थे, जैसे जैसे बड़े होते गए अखबारों में पढ़ते रहेते थे, सच मायेने में इनको कभी लगा नहीं था की ये आगे चलकर एक्टिंग करेंगे कियूं की इनकी जो पढाई (Study) थी वो बायोलॉजी (Biology) फिल्ड से थी और इनके जो मास्टर (Professor) थे वो इनको डॉक्टर (Doctor) बनाना चाहेते थे, लेकिन राजपाल (Rajpal) जी का रुझान अन्दर से था की वो ऐसी Field में जाना चाहेते थे की जिसमे उन्हें नौकरी (Service) न करनी पड़े.

जब Rajpal Yadav इंटरमीडिएट (Intermediate) में थे तो वो अपने मुहल्लों में जब कभी Election होता था तो उसमें भी हिस्सा लेते थे वो बूथ पर बैठकर Origiant होना और वो मुहल्लों में जिस Candidate को जिताना चाहेते हैं उसके लिए प्रचार करना रेली निकालना Campaign में हिस्सा लेना ये सब कर चुके हैं बचपन में काफी शरारती भी थे Rajpal Yadav जी.

Rajpal Yadav खुद बताते हैं की में एक ऐसी दिशा की तलाश में था की कोनसी Filed हैं जिसमे मुझे रोटी, कपडा, और मकान, जो अभी तक माँ-बाप ने जिम्मेदारियां मुझे लेकर उठाई हैं. में अपने पेरों पर कब खड़ा हो पाऊंगा, किस Field में जाऊँगा जो में खुद अपनी जिम्मेदारी से अपना जीवन जी पाऊंगा.

धीरे-धीरे जैसे समय आगे बढ़ रहा था उसी प्रकार Rajpal Yadav जी की सोच भी आगे बढ़ रही थी, इन्होने एक ऑडियंस क्लोजिंग फैक्ट्री है शाहजहांपुर में है वहां इन्होने एडमिशन (Admission) लिया और वहां से इन्होने डाई साल ट्रेनिंग (Training) प्राप्त की. फिर उसके बाद Croation Art Theatre है शाहजहांपुर में जो बहुत ही Stablish संस्था है, इस संस्था में इन्होने आने के बाद जरीफ मालिक आनदं जी जो इस संस्था के संस्थापक थे उनके सहान हित में कला की Training प्राप्त की, और उसमे छोटे-छोटे रोल निभाने लगे इस भूमिका को निभाने में उनको काफी लुत्फ़ मिलने लगा, दूसरा काम करने के मुकाबले इस काम में इनको जियादा Excitement होता था, अन्दर से एक जियादा खुसी होती थी इस काम में. सोचने लगे की यही वो काम तो नहीं है जिसे मुझे करना है जिसमे में आगे बढ़ सकता हूँ.

लेकिन अन्दर ही अन्दर डर भी था की इस Field में इतना बड़ा कम्पटीशन (Competition) है कैसे किया होगा, होना किया था जिनके मजबूत इरादे होते हैं भगवान् भी उनके साथ होता है, राजपाल जी की लगन और महेनत ने उनके होसले को कम होने नहीं दिया, एक दफा भिवा मिश्रा जी के Croation के अन्दर एक रोल प्ले किया अंधेर नगरी चोपट राजा में और जब वो Play हुआ और Show होने के बाद में शायद वह Decision था जो इन्होने सोच लिया था की अब Life (जीवन) में जो भी करूँगा इस Field में करूँगा,

आटे (भोजन) का इन्तिजाम हो तो सोने पे सुहागा होने वाली बात है लेकिन Art (कला) को अब नहीं छोडूंगा लेकिन इश्वर की कृपया से आटे और Art में दोनों संतूलन बरक़रार रहा.

गुरुओं को सम्मान देने वाले शिष्य गुरु तथा अगर्ज दोनों ही स्नेह व अशिष्य लेते रहेते हैं अपने गुरुओं की कथनी को जीवन का मार्ग समझने वाले राजपाल यादव जी ने पीछे मूड कर कभी नहीं देखा लखनऊ से निकल कर इन्होने Delhi में जो काफी मशहूर संस्था हैं (NSD) National School’s Of Drama में दाखिला लिया और यहाँ पर ढाई साल ट्रेनिंग ली, अपने पुरे Focus और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने लगे NSD में इन्होने अपनी कला को और निखारा और 1997 में अपना Career बनाने के लिए वो मुंबई आगये, मुंबई आने के बाद प्रकाशझा के हित में इन्हें एक सीरियल में काम करने का मौका मिला जो (DD) Doordarshan Television पे आता था इस सीरियल का नाम था मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल (Mungeri ke Bhai Naurangilal).

जो इसी चैनल पे आने वाले एक सीरियल मुंगेरीलाल के हसीन सपने (Mungerilal ke Haseen Sapne) का ही सिक्वल था. अब राजपाल पीछे मुड़ने वालों मेसे कहा थे वे आगे बढ़ते गए और 1999 में दिल किया करे से हिंदी फिल्मो में अपना कदम रखा अपनी पहेली फिल्म में इन्होने एक School Watchman की भूमिका निभाई, आगे चलकर हास्य कलाकारी में अपनी धाग जमाई, फिल्म हलचल, गरम मसाला, चुप-चुपके, हेरा-फेरी जैसी अनेक फिल्मों में दर्शकों को काफी लौट पोट भी किया, सिर्फ हास्य कलाकारी में ही नहीं इन्होने मैन लीड (Actor) रोल में भी कही भूमिकाएं निभायीं जो काफी पसंद की गयी फिल्म कुश्ती, मेरी पत्नी और वो, चांदनी बार, हेल्लो हम लल्लन बोल रहे हैं, में माधुरी दिक्सित बनना चाहेती हूँ, जसी कई फिल्मो में और सफल भी हुए अपने इस Man Lead (Actor) की भूमिका में.

Rajpal Yadav जी सनसुई स्क्रीन (Sansui Screen Best Actor Award’s) बेस्ट एक्टर अवार्ड्स से भी नवाजे जा चुके हैं Negative रोल निभाने के लिए हिंदी फिल्म जंगल में, यस भारती आवर्ड और जनपद रत्न अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं, 2006 में आई फिल्म Waqt:The Race Against Time में Film Fare की श्रृंखला में भी Nominate हो चुके हैं Best Actor Comic Role play करने के लिए.

Personal Life : व्यक्तिगत जीवन

किसी का हम सफ़र बनना और किसी को हम सफ़र बनाना ये नियती (भगवान्) के हाथ में होता है तभी तो शायद ये कहा जाता है की जोड़ियाँ ऊपर वाला तय करता है और विवाह जमीन पर तय होती है, और यही बात राजपाल यादव जी की Life में फिट बैठती है, राजपाल यादव बताते हैं की वो फिल्म The Hero: Love Story Of Spy की शूटिंग के लिए कनाडा (Canada) गए हुए थे, वहां एक ऐसी लड़की से मुलाकात हुयी जिसने न कभी शाहजहांपुर (Shahjahanpur) सुना था और न ही राजपाल यादव जी ने कभी केलगिरी (Calgary) सुना था, वहां इनदोनो जोड़ी राजपाल यादव और राधा यादव (Radha Yadav) की मुलाकात हुयी और इन दोनों जोड़ी ने 10 जून 2003 में शादी करली.

राजपाल यादव अपनी सफलता का श्रेय किसे देते हैं आईये जानते हैं:

1999 में दिल किया करे से सफ़र करने वाले राजपाल यादव जी ने मस्त, शूल, जंगल, प्यार तूने किया किया, चांदनी, अनवर, से लेकर Me Madhuri Dixit बनना चाहेती हूँ जैसी अनेक फिल्मो में अपनी अभिनय से नवाजा है, सिर्फ नवाजा ही नहीं बल्कि उसमे धाग भी जमाई है, इस पूरी सफलता का श्रेय वो अपनी माता-पिता, Delhi, शाहजहांपुर, मुंबई, अपने गुरु, और अपने ऑडियंस (Audience) को देते हैं.

“जिस तरह फलों से लदा हुआ व्रक्ष तनता नहीं है, झुकता है उसी तरह सफलता से प्रति उनके विचार बेहद स्पष्ट हैं, शायद यही वजह है की अहेंकार की बयार भी राजपाल यादव जी को छुकर नहीं गुजरी”

सफलता के बारे में राजपाल यादव जी का किया ख्याल है आईये जानते हैं:

अभिनय की गलियारों में अपनी पहेचान बनाते हुए गुजरना सरल नहीं है पर जिन्होंने अपनी गुरुओं का आशीष पाया हो भला उनके पाँव क्यों रुके. राजपाल यादव जी कहेते हैं महेनत ही जिंदगी का आभार है, सफलता के बारे में राजपाल यादव कहेते हैं की सफलता एक चिंगम की तरह है सफलता (चिंगम) को अगर मूंह में चबाते रहिये उसका हल्का हल्का रस लेते रहिये तो वो आपको बहुत मजे देगी, अगर वो चिंगम को आप निगल लेते हैं तो आपकी शायद आतें भी फाढ़ देगी और आपको Operation भी करना पड़ सकता है.

तो चिंगम और सफलता में कोई विशेष अंतर नहीं है सफलता का मजा हमें उतना ही लेना है. जितना हम जैसी चिंगम का मजा लेते हैं और जब चिंगम आपको बौर करने लगे तो उसको थूंक दें और आप नयी चिंगम की तलाश में आपका जो भूक है वो बढ़ने लगेगी. सफलता मिलने पर सफलता का एक सिमित वक़्त तक आनदं लें और फिर वापस एक नयी उर्जा के साथ फिर से लग जाएँ. कियूं की वही इंसान जीवन में सफल होता है जो सफलता को पचा सके.

10 Facts About Rajpal Yadav : कुछ रोचक जानकारियां राजपाल यादव जी के बारे में

 

“राजपाल यादव जी हमेशा अपने कर्म निष्ठा पथ पर चलते रहें वे देश और समाज को अच्छी से अच्छी फ़िल्में देते रहें जो परिवार के साथ देखी, समझी और पसंद की जाएँ हर पग पर कामयाबी उन्हें मिलें पलके बिछाएं यहीं हैं हम सबकी दुआएं”

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