अपने पहले गंभीर रिलेशशिप को कैसे रखें कायम

बीस की उम्र पार करते ही कई चीजों के बारे में आपकी सोच बदल जाती है। आप चीजों को नये ढंग से देखने लगते हैं। और इसमें रिलेशशिप भी शामिल है। इस उम्र में आकर आपके लिए रिश्‍ते के वो मायने नहीं रहते जो कभी स्‍कूल या कॉलेज में हुआ करते थे। अगर किस्‍मत से आपको कोई ऐसा इनसान मिल गया है, सके साथ आप गंभीर रिश्‍ता निभा सकते हैं, तो आप किसी भी कीमत पर उस रिश्‍ते को अपने अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। तो, बिना किसी लागलपेट के हम आपको कुछ टिप्‍स, ट्रिक्‍स बता रहे हैं, जो दीर्घकालिक और गंभीर रिश्‍ते की निभाने में मददगार साबित होंगी।

ध्‍यान से चुनें

अब आप कॉलेज से बाहर आ चुके हैं। और आपकी सोच भी अब पहले से अधिक परिपक्‍व है। अब आप जीवनभर के लिए रिलेशनशिप चाहते हैं। एक ऐसा रिश्‍ता जो दीर्घकालिक हो, जिसे लेकर उसे आप गंभीर हों। आपको किसी ऐसे रिश्‍ते पर ध्‍यान देना चाहिये जहां आपको शुरुआत में ही इस बात के संकेत मिलें कि आप उस व्‍यक्ति के साथ जीवन भर रह सकते हैं। करियर कॉम्‍पेटेबिलिटी इस दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कारक है। अगर करियर, पारिवारिक मूल्‍यों आदि को लेकर आप दोनों की सोच समान है तो आपकी ट्यूनिंग सही बैठ सकती है। अगर आपको लगे कि यह व्‍यक्ति थोड़ा जिद्दी है या फिर इसे दस बरस बाद ही सही आपकी स्‍मोकिंग की आदतों के कारण परेशानी हो सकती है, तो बेहतर होगा कि रिश्‍ते के शुरुआती चरण में ही इस पर फैसला कर लिया जाए।

साथ वक्‍त बिताना

किसी भी रिलेशनशिप में सबसे जरूरी होता है साथ वक्‍त बिताना। और जब आप बड़े हो जाते हैं, तो आपके लिए वक्‍त की कमी ही सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। हो सकता है कि आप दोनों बेहद व्‍यस्‍त हों। अगर आपकी किस्‍मत अच्‍छी है तो आप दोनों एक ही वक्‍त पर व्‍यस्‍त हो सकते हैं। और हो सकता है कि आप दोनों के पास खाली समय भी एक ही मौके पर हो। और अगर ऐसा नहीं है, तो आपके रिश्‍ते के लिए मुश्किल हो सकती है। जरूरी है कि आप अपने साथी की प्राथमिकताओं और वादों को महत्‍व दें।

हो सकता है कि वह अपना सारा समय आपके साथ न बिता सकें। और आपको इससे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिये। हो सकता है कि व्‍यस्‍त जिंदगी के बीच आपको एक दूसरे के साथ पर्याप्‍त वक्‍त बिताने का मौका ही न मिले। कम से कम उतना तो नहीं जितना वक्‍त आप दोनों साथ बिताना चाहते हैं। लेकिन, अब इस‍ दिशा में क्‍या किया जा सकता है।

कैसे करें पैसों की बात

जब आप मिड-ट्वेंटीज में होते हैं, तो पैसा भी रिश्‍तों में अहम किरदार निभाता है। हालांकि आपको इस बात से हैरानी हो सकती है, लेकिन यह बात है पूरी तरह से सही। असली जिंदगी सही मायनों में पैसों पर चलते है और रिश्‍ते भी इससे अछूते नहीं हैं। क्‍या आप अपने खर्चों को 50/50 के आधार पर बांटते हैं या फिर अधिक पैसे वाला पार्टनर ही हर बार बिल देगा। क्‍या आप हर बार अपने साथी के पैसों से ही खरीदारी करते रहेंगे।

क्‍या आप इस तरह की जीवन हमेशा जीते रह सकते हैं। अगर आप किसी ऐसी लड़की के साथ डेट कर रहे हैं या करने की योजना बना रहे हैं जो आपसे ज्‍यादा अमीर है, तो इस बात को याद रखें कि रिश्‍ते में पैसे की अहम भूमिका होती है। जिस व्‍यक्ति के पास अधिक धन है उसके हाथ में रिलेशनशिप की बागडोर होती है। तो, रिश्‍ते की शुरुआत में ही आपको इन सब बातों को साफ कर लेना चाहिये कि आखिर पैसों से जुड़े मसलों को आप दोनों कैसे सुलझायेंगे।

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छोटी छोटी बातें

बड़ी-बड़ी बातों के अलावा किसी भी रिश्‍ते में कई छोटे-मोटे मुद्दे भी आते रहते हैं। तो, आपको यह बात मालूम होनी चाहिये कि आप किस बात पर बहस करना चाहेंगे और कौन सी बात ऐसी है, जिस पर आपको तवज्‍जो नहीं देनी चाहिये। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आप दोनों में कभी लड़ाई होगी ही नहीं। कई बार बहुत ज्‍यादा लड़ाई भी हो सकती है।

कई बार आप पैसे पर भी लड़ सकते हैं। या फिर झगड़ा इस बात को लेकर भी हो सकता है कि आखिर आपने उसे कॉल क्‍यों नहीं किया। ये सब बेमेल की बातें झगड़े का कारण बन सकती हैं। लेकिन, सोचिये क्‍या ये बातें इतनी बड़ी हैं कि इन पर चिल्‍लाकर अपनी ऊर्जा खर्च की जाए। इसके साथ ही सहमति की ताकत को समझें। तो किसी भी परिपक्‍व रिश्‍ते के लिए यह बहुत जरूरी है। कभी आपने कॉम्‍प्रोमाइज किया और कभी आपके साथी ने। यही तो वह बात है जो आपके रिश्‍ते को खूबसूरत बनाती है।

बदलावों का सामना

अगर आप किसी लॉन्‍ग टर्म रिलेशनशिप में हैं, तो समय के साथ रिश्‍ते में बदलाव आने जरूरी है। आप में बदलाव आयेगा, आपके साथी में बदलाव आएगा और यहां तक कि आपका रिश्‍ता और एक दूसरे को लेकर आपकी सोच में भी बदलाव आएगा। आपको इन सबका सामना करना होगा। और इन सबके साथ सामंजस्‍य बैठाना होगा। अगर आप इन बदलावों को स्‍वीकार नहीं करेंगे तो आपके लिए परेशानी हो सकती है। और हो सकता है कि आपका रिश्‍ता समाप्‍त हो जाए।

तो बदलाव के लिए तैयार रहें, और इस बात को मानें कि कोई भी रिश्‍ता एक जैसा नहीं रह सकता। और यही सच है और यही अच्‍छा भी है।

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