बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा स्कूल की लंबी छुट्टियों का असर

नई दिल्ली। कोरोना महामारी में स्कूलों में लंबी छुट्टियों का असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्कूलों के बंद रहने के कारण बच्चों की मानसिक परेशानियों में इजाफा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक स्कूल का लंबे समय तक बंद रहना बड़े बच्चों के लिए ज्यादा नुकसानदेह है। इससे उनके ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी आ रही है। वहीं, छोटे बच्चे अपने हमउम्र दोस्तों के साथ आमने-सामने नहीं खेल पाने के कारण मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। इस वजह से सभी बच्चों को ऑनलाइन दुनिया का सहारा लेना पड़ रहा है। वे बच्चे ज्यादा खतरे में हैं जो पहले से ही थोड़ा कम बोलते हैं और कम घुलते-मिलते हैं। ये बच्चे काफी ज्यादा मानसिक तनाव झेल रहे हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि ज्यादातर बच्चे स्कूल से मिलने वाले समर्थन से कट गए हैं और ऐसे में घर में अभिभावकों के बीच बढ़ रहे झगड़ों से भी उनका तनाव बढ़ रहा है। ऐसे बच्चों के अकेलेपन की भावना घर करती जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जेनेरेशन जेड उन चीजों से जुड़े रहने की कोशिश करती है जिसको वो नियंत्रित कर सकती है। इनमें शरीर के आकार और शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर उग्र व्यवहार देखा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल बच्चों की लाइफलाइन की तरह काम करता है। बच्चों को इससे दूर कर देने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इस समय में बच्चों को काउंसिलिंग करना बेहद जरूरी है।

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