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नमक की अति की तरह कमी भी बुरी

नई दिल्ली। स्वस्थ् रहने के लिए खानदान का संतुलित होना बेहद आवश्यक है। संतुलित खानपान से आप कई ​बीमारियों से बच सकते है। लेकिन संतुलित रहने से मतलब यह बिल्कुल भी नही है कि आप किसी बीमारी से बचने के लिए किसी चीज की मात्रा कम कर दें। जैसे नमक का अत्य​धिक सेवन हानिकारक है वहीं नमक के सेवन में जरूरत से ज्यादा कटौती करना भी आपके लिए सेहतप्रद नही है। क्योंकि नमक हमें संक्रामक रोगों से बचाता है। एक अध्ययन में शोधकर्ताओं के मुताबिक नमक की अति की तरह ही, इसकी कमी भी बुरी है। लंबे समय तक कम मात्रा में नमक खाने से शरीर में ‘इंटरल्यूकिन-17’ का उत्पादन ठप पड़ जाता है। ‘इंटरल्यूकिन-17’ एक तरह की श्वेत रक्त कोशिका है, जो विषाणुओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में प्रतिरोधक तंत्र की मदद करती है।

अध्ययन दल की मानें तो किडनी रोगियों को चिकित्सकीय सलाह के बगैर खाने में नमक की मात्रा नहीं घटानी चाहिए। खासकर ‘जिटेलमैन सिंड्रोम’ और ‘बार्टर सिंड्रोम’ से जूझ रहे मरीजों को। दरअसल, इन दोनों ही बीमारियों में किडनी से सोडियम छनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही वजह है कि इनकी जद में आए मरीजों को बार-बार फंगल और मूत्र संक्रमण से जूझना पड़ता है। डायबिटीज रोगी, थायरॉयड और डिप्रेशन के इलाज में कारगर दवाएं खाने वाले मरीजों को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत सता सकती है। इससे उनके शरीर में सोडियम का स्तर घटने का जोखिम रहता है। सोडियम की कमी चक्कर, कमजोरी, सुस्ती, थकान और भ्रम की शिकायत को जन्म दे सकती है। स्वस्थ वयस्कों को रोजाना 2300 मिलीग्राम अधिकतम सोडियम का सेवन करना चाहिए। सोडियम की मात्रा में अत्यधिक कमी इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का सबब बन सकती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। शरीर के विभिन्न अंगों में खून की आपूर्ति करने के लिए हृदय को सोडियम की जरूरत पड़ती है, इसकी कमी से हार्ट फेल होने का खतरा रहता है। सोडियम का स्तर घटने से बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर बढ़ता है, जो दिल के लिए घातक है।

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