एचाईवी को मारने के लिए एक विषाणु …

एक शोध की है जो की पिन वांग द्वारा नेतृत्व की जा रही है जो की यूएससी वितेर्बी स्कूल आफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं जिन्होंने एक ऐसे विषाणु को विकसित किया है जो की एचाईवी से संक्रमित कोशिकाओं को बहार निकालता है और उनको अलग पहचानने में मदद करता है जो की बाद में दवाओं और अन्य उपचार की मदद से मारे जा सकते है ।यह तरीका फ़ौज में की जाने वाली प्रक्रिया के समान है जिसमे की एक स्नाइपर जो की धरती से निशाने को पहचानता है और फिर एक लेसर निर्देशिका की मदद से उच्च निशाने वाले हवाई जहाज को उस निशाने को पाने और नष्ट करने में मदद करता है ।

aids-ring650x325

इस शोध में पाए गे एपरिनामो के हिसाब से , यह लेन्तिवायरस विषाणु सिर्फ एचाईवी से गरस्त कोशिकाओं को ही प्रभावित करता है ।यह उपचार से होने वाले स्वास्थ्य कोशिकाओं के नुक्सान से बचा लेता है क्योंकि उनको निशाना नहीं बनाया जाता है ।यह लेन्टी विषाणु वैज्ञानिक रूप से एक प्रक्रिया जिसे हम सुसाइड जीन थेरेपी कहते है कराता है जो की ह्यूमन डेफिसिएंसी वायरस को पहचानता है और उसे सामने लाता है ताकि उसका नाद किया जा सके ।यह जो एचाईवी विषाणु को अन्य विषाणु की मदद से मारने का प्रयोग है यह अभी तक सिर्फ कल्चर डिश में ही किया गया है ।इस प्रक्रिया में सिर्फ ३५ % तक एचाईवी से गरस्त कोशिअकाए मरी थी ।हालाँकि संदेह करने वाले इसे एक सफलता नहीं मानेगे पर ऐसा माना गया है की इंसानों में यह अंक बढ़ेंगे क्योंकि लेन्टी विषाणु का जो एचाईवी विषाणु को मारने के तरीका है वह इंसानी शरीर में बार बार किया जाएगा ताकि प्रभावशाली परिणाम मिल सके ।

Gyan Dairy

मुख्य शोधक पिन वांग का यह मानना है की इस शोध से हमे उम्मीद की राह मिली है लेकिन इसके लिए हमे आगे और अत्याधिक शोध करने की ज़रूरत है ।अगला कदम होगा की हम लेन्टी विषाणु को चूहे पर इस्तमाल करे ताकि इनमे एचाईवी से संक्रमित कोशिकाओं को निकालने के लिए धनात्मक परिणाम मिल सके ।

Share