रजोनिवृति के दौरान बदन दर्द की शिकायत

रजोनिवृति के दौरान अक्‍सर महिलाएं बदन दर्द की शिकायत करती है। यह समस्‍या शरीर में प्रोजेस्‍ट्रोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का बनना धीरे-धीरे कम होने के कारण होती है। वैसे तो रजोनिवृति के बाद पीठ में दर्द की शिकायत ज्‍यादा होती है, पर यह दर्द पूरे बदन में कही भी हो सकता है।

रजोनिवृति महिलाओं के जीवन की महत्वपूर्ण अवस्था है। रजोनिवृत्ति, एक महिला में होने वाली वह शारीरिक प्रक्रिया है जो सामान्यतः 40 से 50 वर्ष की उम्र के बीच होती है। जब महिलाओं के दोनों अंडाशयों के अंडे धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं, और अंडाशय हार्मोन बनाना बंद कर देते हैं जिससे धीरे-धीरे प्रजनन क्षमता भी खत्म होने लगती है और मासिक स्राव बंद हो जाता है।

चूंकि इसमें शरीर में प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का बनना धीरे-धीरे कम हो जाता है इसलिये इन हार्मोनों की कमी से कई समस्यायें पैदा हो सकती हैं। जैसे -दिल की धड़कन बढ़ना, अत्यधिक गर्मी या ठंड लगना, सिर दर्द, मोटापा, थकावट, बदन दर्द, खुजली, कामेच्छा में कमी, असंयम, बालों का झड़ना कमर दर्द एवं जोड़ों का दर्द मुख्य है। हालांकि पीठ में दर्द रजोनिवृति में सबसे ज्‍यादा असुविधा देता है, पर दर्द लगभग शरीर में कहीं भी हो सकता है।

बदन में दर्द के कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि रजोनिवृत्ति के दौरान आधे से अधिक महिलाएं बदन में दर्द का अनुभव करती हैं। यह दर्द प्रतिरक्षा प्रणाली में परिवर्तन का परिणाम है जो अस्थिर हार्मोन के कारण होता है।एस्ट्रोजन के स्तर में कमी से सिर दर्द या बदन में दर्द होता है, कई बार तो यह दर्द बिजली के झटके की तरह पूरे सिर में या त्वचा के अन्‍दर सनसनी पैदा कर देता है।

कई महिलाओं को इस दर्द से जीभ में भी सनसनी का अनुभव होता है। रात में अत्‍यधिक पसीने या अन्‍य कारणों से महिलाएं पर्याप्‍त नींद नही ले पाती जो की शरीर में दर्द को योगदान देता है। रजोनिवृत्ति के दौरान कैल्शियम और पोषण तत्‍वों की कमी भी हड्डियों में दर्द कर सकती हैं।

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ऑस्टियोपोरोसिस

रजोनिवृति महिलाओं जोड़ों के दर्द का अनुभव करती है। ये दर्द अक्सर कंधों, घुटनों और कोहनी में महसूस होता है। यदि आप अपनी कलाई में दर्द, पीठ के निचले हिस्से या कूल्हों में महसूस कर रहे हैं, तो यह गुर्दे की कमजोरी, प्रतिरक्षा प्रणाली रोग या बिगड़ती ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत हो सकता है।

रजोनिवृत्ति के दौरान दर्द को जोरदार ऑस्टियोपोरोसिस या अस्थि घनत्व हानि के साथ जोड़ा जाता है, और इन दोनों ही स्थितियों में एस्ट्रोजेन के स्तर में गिरावट होती है।रजोनिवृत्ति के बाद के वर्षों में हड्डी हानि तेजी से होती है, लेकिन उसके बाद यह एक धीमी गति से जारी रहती है।

अक्सर यह परिवर्तन गतिशीलता प्रमुख होते है और अस्थि भंग के विभिन्न प्रकार के खतरे को बढ़ाते है।ओस्टियोपोरोसिस में हड्डियों के घिसने व कमजोर होने से कूल्हे या रीढ़ की हड्डियों में फ्रैक्चर हो जाता है जिसे ठीक करना मुश्किल होता है।

संबंधी कारण

हांलकि एस्ट्रोजन सूजन को कम करने के लिए सीधे कार्य करता है और रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाले जोड़ों के दर्द को टालता है। लेकिन जोड़ों के दर्द के अनेक कारण होते है जिनका हार्मोन के स्तर या उतार चढ़ाव के साथ कोई लेना-देना नहीं है।जोड़ों के दर्द के अनेक कारण हो सकते है जैसे व्यायाम की कमी, सूजन, चयापचय संबंधी विकार, तनाव, वंशानुगत कारक, हड्डी रोग, और कैंसर के रूप में और अधिक गंभीर परिस्थितियां भी शामिल हैं।

समाधान

  • रजोनिवृत्ति से संबंधित दर्द को कम करने या नष्ट करने के लिए कुछ प्रभावी नुस्‍खों को अपनाना होगा।
  • कम शर्करा और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट को अपने भोजन में शामिल करें।
  • फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाए, साथ ही साथ ऐसा भोजन ले जो मल्‍टीविटामिन और ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर हो और नियमित व्‍यायाम करें।
  • समस्‍या के गंभीर होने पर अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।
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