सेक्सुअल रिस्पांस साइकिल

सेक्सुअल प्रतिक्रिया चक्र में शरीर में होने वाले शारीरिक और भावनात्मक बदलावों की पूरी श्रृंखला शामिल है। ये बदलाव तब होते हैं जब कोई व्यक्ति संभोग और हस्तमैथुन के जरिए सेक्सुअली उत्तेजित होता है।

सेक्सुअल प्रतिक्रिया चक्र के प्रति जागरूकता

उत्तेजना के विभिन्न चरणों में शरीर किस तरह प्रतिक्रिया करता है इसके प्रति जागरूक रहने से आपको यह समझने में मदद मिल सकती है कि आपके साथी की चाहत क्या है, जिसे पहचानकर अनुभव को अधिक गहरा और आपसी सम्बन्ध को अधिक मज़बूत बनाया जा सकता है। इससे आपको कुछ सेक्सुअल समस्याएं सुलझाने में भी मदद मिल सकती है जैसे उत्ते़जना के शुरूआती दौर में ही संभोग की शुरूआत और संभोगपूर्व गतिविधियों (फोरप्ले) में कम समय लगाना। शरीर के संकेतों को समझना आप और आपके साथी के लिए फायदेमंद होगा और एक दूसरे के लिए आनंद अधिक बढ़ जाएगा।

सेक्सुअल उत्तेजना के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया

सेक्सुअल उत्तेजना के प्रति आपके शरीर की चार प्रतिक्रियाएं होती हैं

  • रोमांच
  • उभार
  • चरम सीमा
  • समर्पण

पुरूषों और महिलाओं में सेक्सुअल उत्तेजना

पुरूष और महिला, दोनों ही बदलावों के इस क्रम को अपने शरीर में महसूस करते हैं लेकिन इन बदलावों का समयकाल और आवृत्ति उनमें भिन्न हो सकती हैं। औसतन, पुरूष इन चरणों को तेजी से पार करता है जबकि महिलाओं को चरम सीमा तक पहुंचने में वक्त लगता है। चरमसीमा के बारे में कहा जा सकता है कि ऐसा शायद ही कभी होता है कि दोनों साथी चरमसीमा का एक साथ अनुभव करें।

रोमांच का चरण :-  दोनों साथियों में सामान्य बदलाव, जो कुछ मिनटों के लिए होते हैं लेकिन जिनको घंटों तक बढ़ाया जा सकता है।

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  • मांसपेशियों के तनाव का बढ़ा स्तर।
  • नब्ज तेज होना और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ना।
  • त्वचा पर आवेग उभरना, जिसके साथ सीने और पीठ के हिस्से पर लाल निशान बन सकते हैं।
  • निपल्लस आवेशित होना, जो कठोर हो सकते हैं या उठ सकते हैं।
  • प्रजनन अंगों की ओर खून का दौडाव तेज होना, जिससे महिलाओं में क्लिटोरिस और लेबिया और पुरूषों में लिंग कठोर हो जाता है।
  • योनि में चिकनाई आने लगती है, सूजन सी आ जाती है और इसके आसपास की मांसपेशियां कस जाती हैं।
  • महिलाओं में वक्ष (ब्रेस्ट) बढ़ जाते हैं।
  • पुरूषों में अंडकोषों (स्क्रोटम) और वृषण (टेस्टसा) में बदलाव आते हैं, टेस्ट्सा सूज जाते हैं, स्क्रोटटम बढ़ जाता है और चिकना तरल रिसने लगता है।

अधिकांश पुरूषों में यह गलत धारणा है कि योनि का चिकना हो उठना इसका संकेत है कि महिला लिंग प्रवेश करवाने हेतु तैयार है। जबकि योनि का चिकनापन उत्तेजना का आरंभिक स्तर है जिसका अर्थ केवल यह है कि महिला का शरीर सैक्स के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

उभार का चरण :-  इस चरण में शरीर में बदलाव अधिक गहन (तीव्र) हो जाते हैं। यह रोमांच और चरमसीमा के बीच का चरण है और औसत पुरूषों में यह चरण कम अवधि का होता है। यदि पुरूष किसी प्रकार इस चरण की अवधि बढ़ा सकें तो इससे शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारे में मदद मिल सकती है। इस स्टेज पर दोनों साथियों के लिए फोरप्ले करना ज़रूरी है विशेषकर महिला के लिए।

  • सेक्सुअल तनाव तीव्र हो जाता है।
  • योनि में लगातार सूजन आती है और इसका द्वार संकरा होता जाता है। रक्त संचार तेज होने के कारण योनि भित्ति या लेबिया का रंग गुलाबी से बदलकर बैंगनी (पर्पल) हो जाता है।
  • महिला का क्लिटोरिस कठोर और आवेशित हो जाता है।
  • पुरूष में लिंग शीर्ष का आकार बढ़ जाता है और लिंग के शीर्ष पर भी रंग का बदलाव बैंगनी (पर्पल) रंग के रूप में देखा जा सकता है।
  • टेस्ट्सा और स्क्रोटम, शरीर के निकट आ जाते हैं।
  • नब्ज, सांस और ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ते हैं।
  • कुछ लोगों को ‘सेक्स-फ्लश’ का अनुभव होता है जिसका अर्थ यह है कि रक्त संचार तेज होने के कारण शरीर के विभिन्नो हिस्सों पर लाली छा जाती है या वे अधिक मांसल हो उठते हैं।
  • पुरूष के लिंग से स्खलन-पूर्व तरल रिसना शुरू हो जाता है।

चरमसीमा का चरण :- यह चरण, शरीर के सेक्सुअल उत्तेजना और प्रतिक्रिया का चरम होता है। चरमसीमा या क्लाइमेक्स काफी कम अवधि का होता है जो केवल कुछ सेकडों में खत्म हो जाता है। पिछले सभी चरणों के दौरान बना सारा सैक्सुअल तनाव दूर होने लगता है जब चरमसीम

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