सिफलिस के उपचार में कारगर है पेनिसिलिन का इंजेक्‍शन

सिफलिस तीन चरणों में फैलने वाला संक्रामक रोग है। इसका कोई भी घरेलू उपचार नहीं है। सिफलिस के पहले और दूसरे चरण का उपचार आसान होता है, लेकिन तीसरे चरण के उपचार में लंबा समय लग सकता है।

इस रोग का उपचार शुरू करने से पहले व्‍यक्ति के रक्‍त की जांच जरूरी होती है, जिससे यह पता चलता है कि यह बीमारी कौन से चरण में पहुंच चुकी है। इसके पहले और दूसरे चरण का उपचार लगभग एक जैसा होता है, लेकिन तीसरे या अंतिम चरण की चिकित्‍सा अलग होती है।

आमतौर पर सिफलिस के लक्षणों का देर से पता चलता है, इसलिए इसका उपचार भी देर से हो पाता है। यदि स‍िफलिस की पहचान जल्‍द हो जाती है, तो इसका इलाज एंटीबायोटिक से किया जा सकता है। शुरुआती अवस्‍था में पेनिसिलिन की एक खुराक से ही इसका उपचार किया जा सकता है। जब यह रोग शुरुआती चरण को पार करके तीसरे चरण में पहुंच जाता है, तो एंटीबायोटिक की अधिक खुराक उपचार में कारगर होती है।

किसी व्‍यक्ति में रक्‍त जांच के बाद यदि यह पता चलता है कि उसके शरीर में सिफलिस के वायरस पहले या दूसरे चरण में हैं, तो उपचार के लिए पेनिसिलिन की एक खुराक काफी होती है। पेनिसिलिन की खुराक रोगी के कूल्‍हे में इंजेक्‍शन से दी जाती है। कुछ लोगों को पेनिसिलिन से एलर्जी भी हो जाती है, यदि आपको भी ऐसी कोई समस्‍या है, तो डॉक्‍टर से परामर्श करें।

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तीसरे चरण में पहुंचने पर सिफलिस रोगी के हार्ट व नर्वस सिस्‍टम पर भी विपरीत असर डाल सकता है। इसके तीसरे चरण का उपचार पहले या दूसरे चरण से ज्‍यादा समय तक चलता है। रक्‍त जांच में तीसरे चरण की पुष्टि होने पर यह कहना मुश्किल होता है कि इलाज में कितना समय लगेगा। इसमें उपचार के लिए पेनिसिलिन के ज्‍यादा इंजेक्‍शन लगाए जाते हैं। तीसरे चरण के उपचार बाद भी रोगी को प्रत्‍येक वर्ष अपनी रक्‍त जांच करानी चाहिए।

यदि आपको पेनिसिलिन से एलर्जी है, तो इसकी जानकारी डॉक्‍टर को दें। पेनिसिलिन की बजाय टेट्रासाइक्‍लीन या डॉक्सिसाइक्‍लीन का इस्‍तेमाल भी उपचार के लिए किया जा सकता है। उपचार के दौरान घाव सूखने तक नए पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। नए पार्टनर से सेक्‍स करने से पहले आपको यह ध्‍यान देना चाहिए कि उसको इन्‍फेक्‍शन तो नहीं है। यदि आपको जरूरी लगे तो आप जांच भी करा सकते हैं। ध्‍यान देने वाली बात यह है कि सिफलिस का कोई भी घरेलू उपचार नहीं है।

शारीरिक संबंध बनाने के लिए हमेशा कंडोम का यूज करना चाहिए। हालांकि कंडोम पूरी तरफ से सिफलिस के इन्‍फेक्‍शन से बचाव में कारगर नहीं है, कयोंकि इसके घाव कई बार ऐसे हिस्‍से में होते हैं, जिन्‍हें कंडोम से कवर नहीं किया जा सकता। फिर भी कंडोम काफी हद तक सिफलिस से बचाव करता है।

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