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ज्योतिष: अप्रैल की 14 तारीख से थमेगी कोरोना की रफ़्तार, हिंदू पंचांगों ने साल भर पहले की थी भविष्यवाणी

ज्योतिष: अप्रैल की 14 तारीख से थमेगी कोरोना की रफ़्तार, हिंदू पंचांगों ने साल भर पहले की थी भविष्यवाणी
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नई दिल्ली। आज चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2077 का आगाज हो गया है। पूरी दुनिया में आतंक का पर्याय बन चुके कोरोना पर आगामी 14 अप्रैल से नियंत्रण हो जाएगा। यह भविष्यवाणी भारतीय पंचांग के जानकारों ने ज्योतिषीय गणना के आधार पर की है। भारतीय पंचांग ने साल भर पहले विक्रम संवत 2076 की शुरुआत में ही बता दिया था कि दुनिया का इस वर्ष ‘विषाणुजनित महामारी’ से सामना होगा। इसके साथ ही देश में धार्मिक उन्माद की आशंका और शेयर बाजार के धड़ाम होने की भविष्यवाणी हमारे पंचांगों ने कर दी थी।

कोरोना वायरस का असर दिसंबर 2019 में चीन में दिखना शुरू हुआ था। हांलाकि, इसके एक साल पहले फरवरी-मार्च 2019 में प्रकाशित हो चुके भारतीय पंचांगों में ‘विषाणुजनित’ वैश्विक महामारी के संकेत दे दिए गए थे। अब जब यही ज्योतिषशास्त्री कह रहे हैं कि 14 अप्रैल के बाद कोराना का प्रभाव कम होने लग जाएगा, तो इस पर विश्वास न करने का कोई तर्क नहीं है।

भारतीय ज्योतिषशास्त्र ने इसकी भविष्यवाणी कैलेंडरों में दर्ज करा दी थी। यह भी बता दिया था कि विषाणुजनित महामारी। देश के मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेशचंद्र पोखरियाल ने जब कोरोना फैलने के पहले ही ऐसी किसी महामारी की आशंका जताई थी, तो देश के एक वर्ग ने उनका जमकर मजाक उड़ाना शुरू कर दिया था। हालांकि अब मजाक उड़ाने वालों को दूसरा बहाना खोजना होगा।

पाप ग्रहों के मिलने से बना दुर्योग

पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में आ गया है और इससे हजारों लोगों की मृत्यु हो चुकी है, तो उन्नाव निवासी आचार्य अजेन्द्र प्रकाश शुक्ल कहते हैं कि जब भी पृथ्वी पर किसी भी प्रकार की कोई घटना-दुर्घटना होती है, तो उसके पीछे ग्रह-नक्षत्रों का व्यापक प्रभाव होता है। सामान्य जनजीवन पर ग्रह-नक्षत्रों का व्यापक प्रभाव भी होता है, और इनके बदलाव से समस्या से निजात भी मिलने लग जाती है। आचार्य अजेन्द्र प्रकाश शुक्ल के अनुसार कोरोना वायरस का असर दिसंबर 2019 में चीन से दिखाई देना शुरू हुआ है। दिसंबर 2019 में शनि, बृहस्पति, केतु और सूर्य धनुराशि में थे। सूर्य, शनि और केतु पाप ग्रह हैं, जिनके मिलने से इस प्रकार का दुर्योग बना कि एक विषाणुजनित महामारी का वैश्विक प्रसार हो रहा है। 24 जनवरी, 2020 को गोचर में शनि के मकर राशि में प्रवेश के बाद इस बीमारी का संकट और गहराया और विषाणु तेजी से अपने पांव पसारने लगा। त्रिपाठी के अनुसार 14 अप्रैल, 2020 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही इस महामारी की तीव्रता कम होने लग जाएगी।

आचार्य अजेन्द्र प्रकाश शुक्ल ने बताया कि बृहस्पति 30 मार्च को मकर में प्रवेश करेंगे, जो उनकी नीच राशि है। फिर शनि से जुड़ जाएंगे, जो अधिक अशुभ फल देने वाला है। वर्तमान वर्ष की शुरुआत, चैत्र मास शुक्ल पक्ष के पहले दिन, शनिवार पड़ा था। वर्ष का पहला दिन ही ज्योतिष के अनुसार वर्ष का राजा माना जाता है। राजा शनि के फल में ही लिखा है कि किसी विषाणुजनित महामारी का प्रकोप होगा। बृहद संहिता में भी यही कहा गया है।

पिछले साल कर दी थी भविष्यवाणी

विषाणुजनित महामारी का उल्लेख भारतीय पंचांगों ने साल भर पहले ही कर दिया था। जाहिर है, भारतीय पंचांग चैत्र माह में हिंदू नववर्ष की शुरुआत पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिनकी छपाई इससे भी पहले पूर्ण कर ली जाती है। पिछले वर्ष प्रकाशित श्री ऋषिकेष हिंदी पंचांग के पृष्ठ तीन पर ‘विश्र्व तथा भारत का फल’ शीर्षक के अंतर्गत किसी विषाणुजनित महामारी के संकेत दिए गए हैं।
भारत वर्ष की कुंडली के अनुसार भी 14 अप्रैल तक समय ज्यादा खराब है। भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 25 मार्च, 2020 दिन बुधवार को होगा। यानी आनेवाले वर्ष के राजा बुध होंगे। उनके साथ मंत्री के रूप में चंद्र रहेंगे। इन दोनों के प्रभाव से इस रोग का शमन जून 2020 तक हो जाएगा। 13 अप्रैल को रात्रि 8.23 मिनट से सूर्य का संक्रमण मीन राशि से मेष राशि में हो जाएगा। उसके बाद कोरोना वायरस के बुरे प्रभाव में कमियां आने लगेंगी। 27-28 अप्रैल के बाद सूर्य का संक्रमण मेष में 15 डिग्री से आगे बढ़ने पृथ्वी स्थित वासी इसके बुरे प्रभाव से बचने लगेंगे।

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