बड़ी खबर: जानिए कहां दो दलित प्रोफेसर्स किए गए सस्पेंड, बिना बताए कमरे से बाहर फेंक दिया

देशभर में दलितों के उत्पीड़न के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक ओर जहां इस कॉलेज ने देश और दुनिया को साहित्य, संगीत, कला, सिनेमा, राजनीति, अर्थशास्त्र आदि सभी क्षेत्रों मे प्रतिष्ठित विद्वान दिए हैं। वहीं आजकल यह जातीय उत्पीड़न का अड्डा बनता हुआ नजर आ रहा है। यहां दो दलित प्रोफेसर्स को निलंबित किया गया है।

सूत्रों ने बताया कि तनुजा मजूमदार विभाग की इकलौती प्रोफेसर हैं,  मनमाना आरोप मढ़कर टोक-नमस्कार तक नहीं करतीं। वे 10 साल से लगातार विभागाध्यक्ष हैं। बाक़ी सभी वहां सहायक प्राध्यापक हैं। दोनों शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं।

दो शताब्दी पहले बने प्रेसीडेंसी कॉलेज ( अब यूनिवर्सिटी) में दलित प्रोफेसर्स के साथ उत्पीड़न का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि हिन्दी विभाग में प्रोबेशन पीरियड में कार्यरत शिक्षक अनिल पुष्कर और पिछड़े समाज से आने वाले सत्यदेव प्रसाद को हिंदी विभाग की प्राध्यापक और विश्वविद्यालय की डीन तनुजा मजूमदार ने असंतोषजनक प्रदर्शन का झूठा आरोप लगाकर नियुक्ति रद्द कराने की साज़िश रच डाली।

Gyan Dairy

जबकि यहां के विद्यार्थियों का कहना है कि उक्त शिक्षकों की शिक्षण विधि बिल्कुल भिन्न रही है और अपने आप में नायाब भी। वहीं डा. तनुजा पर आरोप लगते रहे हैं कि वे छात्रों को आए दिन धमकाती रहती हैं कि अगर इन शिक्षकों के पक्ष में खड़े हुए, तो गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो। दोनों प्रताड़ित शिक्षकों ने रजिस्ट्रार, कुलपति, राज्य के शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सब तक अपनी बात पहुंचाई, मगर कोई जवाब नहीं मिला है।

सूत्रों ने बताया कि लगातार दोनों शिक्षकों को बार-बार कैम्पस खाली करने का नोटिस भेजकर विश्वविद्यालय प्रशासन मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा और दो दिन पूर्व अनिल पुष्कर को बिना अंतिम रूप से कॉल किए उनका सामान उनके आवास से फेंक बाहर कर दिया गया।

Share