भारत और चीन के बीच हुई 9वें दौर की वार्ता, ड्रैगन को पीछे हटने पर भारत ने दिया जोर

नई दिल्ली। चीन और भारत की सीमा विवाद पर जारी गतिरोध के बीच भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच करीब ढाई महीने के अंतराल के बाद रविवार को नौवें दौर की बैठक हुई है।15 घंटे चली इस बैठक में भी भारत की तरफ से दो टूक कहा गया है कि चीन एलएसी पर मई से पहले की स्थिति करें और पीछे हट जाए। एलएसी पर मई के बाद से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों के 50-50 हजार सैनिक पूर्वी लद्दाख में तैनात हैं। भारत और चीन की इस नौवें दौर की बैठक में बातचीत का मुख्य उद्देश्य पिछली बैठक में बनी सहमतियों पर आगे बढ़ना था। और यह तय किया जाना था कि दोनों देश किस प्रकार से अपने सैनिकों को टकराव वाले स्थानों से पीछे हटाएं।

इसकी एक रुपरेखा पिछली बैठक में बनी थी, लेकिन अभी तक उसका क्रियान्वयन नहीं हुआ है। रविवार को दोनों देशों के बीच हुई यह बातचीत सीमा में पड़ने वाले मोल्डो में सुबह दस बजे शुरू होके देर रात तक चली। इसमें भारत का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया, जबकि चीन की तरफ से तिब्बत क्षेत्र के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन इस वार्ता में शामिल हुए। पिछली बैठक छह नवंबर को हुई थी, जिसमें टकराव वाले स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने पर चर्चा हुई थी और इसका मोटा खाका भी तैयार किया गया था। इसके तहत पहले चरण में दोनों देशों के टैंक, तोप आदि हथियार हटाए जाने थे।

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दूसरे चरण में चीन को पेंगोंग त्सो के फिंगर 8 तक पीछे हटना था। भारत को फिंगर 2 तक पीछे आना था। तीसरे चरण में पूरी तरह से मई से पहले की स्थिति बहाल करने पर बात हुई थी।आठवें दौर की बैठक में दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर उसे सकारात्मक बताया थाए लेकिन इस प्रस्ताव पर प्रगति नहीं हुई। यही नहीं, नौवें दौर की बैठक में भी ढाई महीने का समय लग गया। रविवार को हुई बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे।

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