क्यों आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री पर टिके रोजगार के भी बड़ी गिरावट आ सकती है

भारत में ऑटो इंडस्ट्री पर भी बड़ी संख्या में देश का रोजगार टिका हुआ है। आंकड़ों की माने तो इसमें प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 2.9 करोड़ लोग काम करते हैं। मैन्युफैक्चरिंग में इसका योगदान लगभग 50% और जीडीपी में 7.1% है। भारत को बड़ा कार मार्केट देखते हुए विदेशी कंपनियां आकर्षित भी होती रही हैं। अमेरिका की सबसे बड़ी कार कंपनी जनरल मोटर द्वारा भारत में अपना कारोबार समेटने की तैयारी के बाद अब कुछ और कार कंपनियां देश छोड़ सकती हैं।

जनरल मोटर द्वारा भारत में बिक्री बंद करने से 8% यानी करीब 400 कर्मचारियों की नौकरी जाएगी। ऑटो सेक्टर रोजगार के लिहाज से काफी अहम है। गुजरात का हलोल प्लांट जीएम ने पिछले महीने बंद कर दिया था। इससे करीब 1,100 कर्मचारी प्रभावित हुए थे।

रिपोर्ट की माने तो भारत में अपने ख़राब प्रदर्शन के बाद फोक्सवैगन, स्कोडा, फोर्ड, फिएट और निशान भी भारत छोड़ सकते हैं। कहा जा रहा है कि ये कंपनियां अगर भारत से जाती है तो इससे बड़ी संख्या में रोजगार भी प्रभावित हो सकता है। भारत में कम-से-कम 17 कार निर्माता कंपनियां हैं और इनमें से टॉप चार कंपनियों का 75 प्रतिशत बाजार पर नियंत्रण है।

एक रिपोर्ट के अनुसार सेल्स में आ रही दिक्कतों के बाद फोक्सवैगन के सेल्स हेड, कॉर्पोरेट सेल्स के नैशनल हेड और साउथ सेल्स मैनजर ने कंपनी छोड़ दी है। कंपनी जिसके पूरे ग्रुप ने पिछले साल 1 करोड़ से ज्यादा कारें बेची। लेकिन, भारत में इसे जूझना पड़ रहा है। फोक्सवैगन ब्रैंड के बैनर तले भारतीय यूनिट ने 2016-17 में 50,042 कारें बेचीं और 1.6 प्रतिशत मार्केट पर कब्जा किया।

इसी तरह फोर्ड को भी तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 2014 में कंपनी के ग्लोबल सीईओ बने मार्क फील्ड्स को हाल ही में हटा दिया गया है। इसकी दो बड़ी वजहें कंपनी के शेयरों का अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाना और मूल व्यवसाय का विस्तार करने में अक्षमता रहीं।

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फोक्सवैगन ग्रुप की कंपनी स्कोडा भी भारत में बहुत कठिनाई का सामना करती दिख रही है। कंपनी के इंडिया एमडी सुधीर राव ने हाल ही में रिजाइन कर दिया और वह बस जून के आखिर तक का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। स्कोडा इंडिया ने 2016-17 में महज 13,712 कारें बेचीं और यह मार्केट शेयर के लिहाज से महज 0.45 प्रतिशत है।

भारत में इसकी मौजूदगी सुजुकी से भी पहले से है, लेकिन 2016-17 में कुल 5,665 कारों की बिक्री के साथ कंपनी महज 0.0018% मार्केट शेयर ही हासील कर पाई। प्रीमियर ऑटोमोबिल्स के साथ पार्टनरशिप में लंबे समय तक संचालन के बाद फिएट ने 1997 में टाटा मोटर्स के साथ 50:50 की हिस्सेदारी से जॉइंट वेंचर बना लिया।

भारत में निशान की स्थिति फिएट के मुकाबले बेहतर है। हालांकि, दोनों में महत्वपूर्ण अंतर यह है कि इस जापानी कार निर्माता कंपनी भारत में बहुत बाद आई। निशान ने भारत में अपनी पहला मॉडल माइक्रा 2009 में लॉन्च किया। 2016-17 में उसने 57,300 कारें बेचकर 1.88 प्रतिशत मार्केट पर कब्जा किया

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