विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश

वाराणसी। वाराणसी में भगवान भोलेनाथ के विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अदालत ने पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश जारी कर दिया है। साल 1991 से चल रहे मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया को अपने खर्चे पर खुदाई करने का निर्देश दिया है। ऑब्जर्वर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी गठन करने को भी कहा गया है।

सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) आशुतोष तिवारी ने ज्ञानवापी मामले में वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी द्वारा परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अर्जी स्वीकार कर ली। पिछले तिथि पर कोर्ट ने पक्षकारों की बहस दलील सुनने के बाद आठ अप्रैल के लिए आदेश सुरक्षित कर लिया था। आखिरकार लंबे समय बाद ज्ञानवापी मामले में पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की अपील (प्रार्थना पत्र) को कोर्ट ने मंजूर कर लिया है।

इस बाबत प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की ओर से वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कोर्ट में दलील दी कि वर्तमान वाद में विवादित स्थल की धार्मिक स्थिति 15 अगस्त 1947 को मंदिर की थी अथवा मस्जिद की इसके निर्धारण के लिए साक्ष्य की आवश्यकता है। विवादित स्थल विश्वनाथ मंदिर का एक अंश है इसलिए एक अंश की धार्मिक स्थिति का निर्धारण नहीं किया जा सकता, बल्कि ज्ञानवापी परिसर का भौतिक साक्ष्य लिया जाना जरूरी है। जिसे पुरातात्त्विक विभाग जांचकर वस्तुस्थिति स्पष्ट कर सकता है कि ढांचा के नीचे कोई मंदिर था अथवा नहीं।

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पुराने मंदिर के दीवारों और दरवाजों को चुनकर वर्तमान ढांचा का रुप दिया गया बताया है। मंदिर पक्ष का दावा है कि पुराने विश्वनाथ मंदिर के अलावा पूरे परिसर में अनेक देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर थे जिनमें से कुछ आज भी विद्यमान हैं। वहीं वर्तमान ज्योर्तिलिंग की स्थापना 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था।

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