भोपाल गैस त्रासदी: सीएम शिवराज बोले-असुरक्षा से कोई चीज़ न बनाए जो इंसान पर भारी पड़े

नई दिल्ली। भोपाल गैस त्रासदी का आज 36 वर्ष पूरे हो गए। 3 दिसंबर 1984 को हुए इस विकराल दुर्घटना में हजारों की संख्या में लोगों की जान गयी। वहीं, इस हादसे में कई दिव्यांग हो गए। इस मौके पर मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जो गैस पीड़ित भाई-बहन बचे हैं उनकी ज़िंदगी कैसे गुजरी हम जानते हैं।

मेरी वो विधवा बहनें जिनका सबकुछ त्रासदी में चला गया उनकी 1000 रुपये की पेंशन जो 2019 में बंद कर दी गई थी दोबारा शुरू की जाएगी ताकि अंतिम समय उनका ऐसे संकटों से न गुजरें। इसके साथ ही शिवराज सिंह ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी का स्मारक हमें भोपाल में जल्द बनाना चाहिए ताकि ये स्मारक दुनिया को सबक दे। इसके साथ ही हमें याद दिलाए कि कोई शहर भोपाल न बने। हम असुरक्षा से कोई चीज़ न बनाए जो इंसान पर भारी पड़े।

जैसे हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम का उपयोग न हो ये सीख देते हैं। गौरतलब है कि, 3 दिसंबर को हुआ ये हादसा इतिहास में होने वाला सबसे बड़ा औद्योगिक हादसा था। यूनियन कार्बाइड कारखाने के 610 नंबर के टैंक में खतरनाक मिथाइल आइसोसाइनाइट रसायन था। टैंक में पानी पहुंच गया। तापमान 200 डिग्री तक पहुंच गया। धमाके के साथ टैंक का सेफ्टी वाल्व उड़ गया। उस समय 42 टन जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3,787 की मौत हुई।

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