पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- फर्स्ट कजन बच्चों में शादी अवैध

नई दिल्ली। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि फर्स्ट कजन यानी सगे चाचा-ताऊ, मामा-बुआ और मौसी के बच्चों के बीच शादी पूरी तरह से गैरकानूनी है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की जिसमें याचिकाकर्ता अपने पिता के सगे भाई यानी अपने चाचा की बेटी से शादी करना चाहता है।

दरअसल, याचिकाकर्ता युवक के खिलाफ लुधियाना के खन्ना सिटी-2 थाने में आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) और 366ए (नाबालिग लड़की को कब्जे में रखने) के तहत केस दर्ज है। उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत के लिए अनुरोध किया। याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि लड़की नाबालिग है। उसके माता-पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसके और लड़के के पिता आपस में सगे भाई हैं।

वहीं, युवक के वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने लड़की के साथ मिलकर एक याचिका दाखिल की थी। इसमें दोनों ने जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा की गुहार लगाई थी। मौजूदा सुनवाई के दौरान ही इस याचिका की फाइल कोर्ट में तलब की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि लड़की की उम्र 17 साल है और याचिकाकर्ता ने याचिका में दलील दी थी कि दोनों सहमति संबंध में हैं।

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याचिका में यह भी कहा गया था कि लड़की की जन्म तारीख अगस्त, 2003 है और 3 सितंबर, 2020 को जब याचिका दायर की गई, तब लड़की की उम्र 17 साल 14 दिन थी। इसमें लड़की ने अपने माता-पिता द्वारा दोनों को परेशान किए जाने की आशंका जताई थी। लड़की की ओर से यह भी कहा गया कि उसके माता-पिता केवल बेटों को प्यार करते हैं और उसे पूरी तरह अनदेखा किया गया है।

जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान ने मौजूदा याचिका पर सुनवाई के बाद कहा, मुझे लगता है कि मौजूदा याचिका में भी याचिकाकर्ता ने इस तथ्य के बारे में खुलासा नहीं किया है कि वह लड़की का सगा चचेरा भाई है। इस याचिका में कहा गया है कि जब लड़की 18 वर्ष की हो जाएगी तो वे विवाह करेंगे। लेकिन तब भी यह गैरकानूनी होगा।

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