बिहार: चिराग पासवान बोले- चाचा और भाई पीठ में छूरा खोंपा, समर्थकों से किया ये आह्वान

पटना। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के संस्थापक रामबिलास पासवान के बेटे चिराग और भाई पशुपति पारस के बीच पार्टी पर कब्जे की जंग जारी है। इस बीच चिराग पासवान ने अपने ट्वीटर हैंडल से चार पन्‍ने की चिट्ठी पोस्‍ट की है। इस चिट्ठी में चिराग पासवान ने पार्टी में बगावत की पृष्‍ठभूमि से लेकर आगे के संघर्ष तक का विस्‍तार से उल्‍लेख किया। चिराग पासवान ने कहा कि उनके पिता ने कभी अपने-पराए का भेद नहीं किया लेकिन उनके जाने के बाद चाचा पशुपति कुमार पारस और भाई प्रिंस राज ने पीठ में छुरा घोंप दिया। चिराग ने कहा कि वह शेर के बेटे हैं इसलिए किसी भी परिस्थिति में डरते हैं न घबराते हैं। हां परिवार के टूटने का दु:ख जरूर है।

चिराग पासवान ने अपने समर्थकों से लम्‍बी राजनीतिक और सैद्धांतिक लड़ाई के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है। चिराग ने कहा कि पार्टी से निलम्बित मुट्ठी भर लोग हमसे हमारी लोजपा नहीं छीन सकते। चिराग ने अपनी चिट्ठी में भाजपा को याद दिलाया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी का नाम घोषित किए जाने के बाद भी लोजपा ने उनसे हाथ मिलाया था। जबकि उस दौरान उनके पुराने साथी नीतीश कुमार ने उन्हें छोड़ दिया था।

Gyan Dairy

चिराग पासवान ने लोजपा की टूट के लिए जदयू को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने हमेशा से ही दलित नेतृत्व को बांटने का काम किया है। वो अभी तक मेरे पिता के पीछे थे और अब मेरे खिलाफ हैं। उन्‍होंने दलितों और महादलितों को बांटा है। इससे अनुसूचित जातियों में एक उप-विभाजन हुआ। नीतीश कुमार दलित समाज को मजबूत होते नहीं देखना चाहते हैं। चिराग पासवान ने कहा कि पिछले चुनाव में बिहार में हर कोई नीतीश कुमार का विकल्‍प चाहता था। जिस तरह से अकेले चुनाव लड़ने से हमें समर्थन मिला है, उससे हम खुश हैं। चुनाव में हम 135 सीटों पर लड़े और हमें 6 फीसदी वोट मिला। लोजपा को गठबंधन में सिर्फ 15 सीटों की पेशकश की गई थी।

Share