बिकरू कांडः विकास दुबे का गुर्गा बांट रहा था कारतूस, आठ पुलिसवालों को मारी गईं 64 गोलियां

लखनऊ। कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड की सच्चाई धीरे धीरे बाहर आ रही है। वारदात के बाद प्रचारित किया गया कि जब गोलीबारी हुई तब गांव में अंधेरा फैला था। जबकि सच्चाई ये थी कि उस काली रात बिकरू गांव में भरपूर उजाला था। पूरा गांव बिजली और सोलर लाइट की रोशनी में जगमगा रहा था। पुलिस टीम भी ड्रैगन लाइटों और टार्चों से लैस थी। कुछ समय बाद तार टूटने की सूचना पर गांव की बिजली काटी गई।

एनकाउंटर के समय दबिश देने पहुंची पुलिस टीम में शामिल रहे सिपाही पिंटू तोमर ने बयान में कहा कि घटना वाले दिन पर्याप्त बिजली व सोलर लाइट थीं। यही बयान दबिश के दौरान मौजूद रहे हेड कांस्टेबल अखिलेश कुमार और सिपाही नवनीत ने दिया है। सिपाही कुंवरपाल ने बयान में कहा कि पुलिस के पास कई ड्रेगनलाइट और टार्च भी मौजूद थीं। सिपाही अवनीश कुमार ने कहा कि जो टीमें दबिश पर गई थीं उनके पास रोशनी के लिए पर्याप्त उपकरण थे।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बिजली विभाग के अवर अभियंता अवधेश सिंह के पत्र को भी शामिल किया है। पत्र में अवर अभियंता ने कहा कि उन्हें 2 जुलाई की रात सवा दो बजे बिकरू गांव में तार टूटने की सूचना मिली थी। इस सूचना के बाद बिकरू गांव की बिजली काट दी गई। इसके बाद रात करीब साढ़े तीन बजे तार जोड़ने की रिपोर्ट मिलने के बाद बिजली दोबारा चालू कर दी गई।

बिकरू गांव में दुर्दांत विकास दुबे और उसके साथियों ने सैकड़ों की तादात में गोलियां बरसाईं थी। घायलों को लगी गोलियां और दीवारों, फर्श और हवा में चली गोलियों को छोड़ दें तो हत्यारों ने 64 गोलियां अकेले शहीद होने वाले आठ पुलिसकर्मियों पर दागीं थीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि फायरिंग के बीच ही विकास दुबे का एक गुर्गा अपने साथियों को कारतूस बांट रहा था। फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सीओ देवेन्द्र दुबे सहित आठ शहीद पुलिसकर्मियों के शरीर पर कुल 64 गोलियां दागीं गईं थी। शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्रा के शरीर पर गोलियों के 5 घाव थे। सारी गोलियां राइफल से उनके शरीर पर सटाकर मारी गईं थीं।

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इसके साथ ही थानाध्यक्ष शिवराजपुर महेशचन्द्र यादव के शरीर पर नौ गोलियां लगीं थीं। इनमें 2 राइफल की, 2 सेमी आटोमेटिक राइफल की, बाकी 5 गोलियां पिस्टल से मारीं गईं थीं। इसके साथ ही चौकी प्रभारी मंधना अनूप कुमार को 12 गोलियां मारी गईं थीं। इसके साथ ही दरोगा नेबूलाल के शरीर में नौ गोलियां लगीं थीं।

सिपाही सुल्तान को चार गोलियां राइफल से मारी गईं थीं। सिपाही बबलू कुमार को भी चार चोटें लगीं। उनमें से दो राइफल के क्लोज रेंज से फायर की गई थीं। बाकी दो चोटें धारदार हथियार से लगने की पुष्टि हुई। सिपाही राहुल कुमार के शरीर पर नौ घाव थे। जिसमें एक चोट धारदार हथियार से, 6 पिस्टल से और 2 रायफल की गोलियां शरीर से आरपार होने की पुष्टि हुई थी। सिपाही जितेन्द्र पाल को हत्यारों ने 12 गोलियां मारीं। जिसमें 10 क्लोज रेंज राइफल फायर थे। दो गोलियां पिस्टल से उनके शरीर पर सटाकर मारी गईं।

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