दास प्रथा को मिटाए बिना सभ्य समाज का निर्माण संभव नहीं: स्वर्ण भारत परिवार

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष 23 अगस्त को दास व्यापार और उसके उन्मूलन की याद के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है। यह दिवस सभी लोगों की स्मृति में दास व्यापार की त्रासदी को दर्शाने के लिए मनाया जाता है। यूनेस्को द्वारा ट्रांसलेटैटिक दास व्यापार को याद करने के लिए दिन को नामित किया गया था।गुलाम व्यापार और दास प्रथा के विरुद्ध स्वर्ण भारत परिवार ने अपनी आवाज बुलंद की है। स्वर्ण भारत परिवार ने कहा कि आज भी दास प्रथा जैसी परम्पराएं जीवित हैं। इनको जड़ से मिटाने की सख्त जरूरत है। जब तक ये कुरीतियां समाज से नहीं मिट जातीं, तब तक सभ्य समाज का निर्माण संभव नहीं है।

दरअसल गुलाम प्रथा के खिलाफ 23 अगस्त 1791 में सैन डोमिंगो, आधुनिक हैती के द्वीप पर सबसे बड़ा दास विद्रोह हुआ था। हैती उस समय एक फ्रांसीसी उपनिवेश था। यह घटना, जिसने गुलामी के उन्मूलन की शुरुआत को चिह्नित किया, को यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड के 150 वें सत्र में प्रतिवर्ष मनाया जाना प्रस्तावित था। गुलाम व्यापार के पीड़ितों के स्मरण और उसके उन्मूलन के लिए विद्रोह की शुरुआत का दिन अंतर्राष्ट्रीय दिवस बन गया।

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इसी अंतर्राष्ट्रीय दिवस के मौके पर स्वर्ण भारत परिवार ने भी एक कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में आस्ट्रेलिया से रोशनी लाल जी ने भारत मे गुलाम मजदूरों की स्थिति के बारे में एक फोटो शेयर करके यह दर्शाया की भारत पीड़ित देश रहा है। कभी अंग्रेज कभी फ्रांसीसी तो कभी मुगलों ने यहां गुलामी की परंपरा डालने का प्रयास किया था। वहीं अजिता सिंह ने कहा कि युवा हर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं। इस मुद्दे को जमीनी स्तर तक उठाने की जरूरत सीमा मिश्र ने आज बच्चो को संबोधित करते हुए कहा गुलाम बनना और गुलाम बनाने की चाह दोनो पाप है , राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष पांडेय ने आज जिला अधिकारी को पत्र लिख कर कहा कि स्वर्ण भारत परिवार इस अन्याय के विरुद्ध सरकार के साथ खड़ा है जहां भी सहयोग चाहिए हम आपके साथ है विधि सलाहकार रंजीत पांडेय ने इसे कानूनी रूप से गलत माना और कहा किसी को किसी भी रूप से गुलाम बनाने के लिए बाध्य करना ये भारतीय दंड प्रक्रिया के अनुसार एक घोर अपराध की श्रेणी में आता है।

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इस तिथि को दुनिया भर के कई देशों में मनाते हैं। एक अन्य पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेश, सेनेगल के तट से दूर गोरी द्वीप पर पीड़ितों और उसके परिसमापन के स्मरणोत्सव का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। यह द्वीप लगभग तीन सौ साल पहले अफ्रीका से गुलामों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए पारगमन का केंद्र था। यह जीवित वस्तुओं का सबसे बड़ा बाजार था। हर साल, 23 ​​अगस्त को, इस घृणित घटना के पीड़ितों को मनाने के लिए एक समारोह आयोजित किया जाता है।

इस शताब्दी की शुरुआत में, दासता के इतिहास का एक संग्रहालय अमेरिका के ओहियो में खोला गया था, जो दास-मालिक दक्षिण का पूर्व केंद्र था। यह संग्रहालय पूरे वर्ष भर काम करता है, लेकिन अगस्त के अंत में इसके कर्मचारी नई प्रदर्शनियों और मोबाइल एक्सपोज़िशन का आयोजन करते हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास के इस पृष्ठ के बारे में बताते हैं – एक ऐसा देश जो आज खुद को सबसे लोकतांत्रिक मानता है। इस दिन पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय न केवल अपने अधिकारों और मानवीय गरिमा के लिए गुलाम संघर्ष के शानदार मील के पत्थर को याद करता है। यह विकसित देशों में उन प्रगतिशील लोगों को भी श्रद्धांजलि देता है, जिन्होंने एक साथ या अकेले इस शर्मनाक घटना का विरोध किया, इसे खत्म करने की मांग की।

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