तीस्ता सीतलवाड़ के बाद अब नारायणमूर्ति और मोंटेक सिंह अहलूवालिया का NGO फंसा

जिस एनजीओ का उद्घाटन साल 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था, अब वह विदेशी संस्थाओं से वित्तीय मदद नहीं ले सकेगा। केंद्र सरकार ने एनजीओ पब्लिक हेल्थ फांउडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया है। एनजीओ पर एफसीआरए कानून का उल्लंघन करने का आरोप है। गृह मंत्रालय को शिकायत मिली थी कि एनजीओ विदेशी वित्तीय सहायता का इस्तेमाल दूसरे मदों में कर रहा है और जाँच में ये शिकायतें सही पायी गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबंधित संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने गेट्स फाउंडेशन और बड़ी दवा कंपनियों के बीच गठजोड़ होने और इसका प्रभाव स्वास्थ्य नीति पर पड़ने का आरोप लगाया था।

इसे पहले स्वदेशी जागरण मंच ने कहा था कि वह केंद्रीय स्वास्थय मंत्री से मिलेंगे और बिल एंड मिलिंडा गेट्स फांउडेशन द्वारा पीएचएफआई के वित्तपोषण के मामले को उठाएंगे। गृह मंत्रालय के मुताबिक़ पीएफएफआई का एफसीआरए लाइसेंस इसलिए रद्द किया गया है क्योंकि एनजीओ ने सांसदों से लॉबिंग में इसका इस्तेमाल किया।

दिल्ली स्थित इस एनजीओ का मकसद केंद्र और राज्य सरकारों को एचआईवी से बचाव और दवाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना है। एनजीओ पीएचएफआई का एफसीआरए कानून के उल्लंघन में पकड़ा जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि इस एनजीओ से कई दिग्गजों के नाम जुड़े हुए हैं। इनमे इनफ़ोसिस के फाउंडर एनआर नारायण मूर्ती, योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया और स्वास्थ्य सचिव सीके मिश्रा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

पीएचएफआई पर यह भी आरोप थे कि उसने बैंक खाते खोले और उनकी जानकारी मंत्रालय को नहीं दी। इस खातों के जरिये पिछले तीन सालों में उसने विदेशी धन प्राप्त किया।  रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि एनजीओ ने गृह मंत्रालय को बताये बिना भारत के बाहर रकम स्थानांतरित की।

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गौरतलब है कि मई 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद गृह मंत्रालय ने 20,000 एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद्द किये। इनमें से 9,900 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों के एफसीआरए लाइसेंस 2015 में रद्द कर दिए गए थे। इनमे वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) इंदिरा जयसिंह का एनजीओ, ग्रीनपीस, और तिस्ता सीतलवाड़ का सबरंग ट्रस्ट शामिल हैं।

एनजीओ के प्रमुख के. श्रीनाथ रेड्डी ने बताया कि संगठन की ओर से मंत्रालय को इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज मुहैया कराते हुये इसका शीघ्र समाधान करने का अनुरोध किया गया था। संस्था का लाइसेंस पिछले साल अगस्त में पांच साल के लिए रिन्यू किया गया था।

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