मनरेगा के जॉब कार्ड क्यों रद्द कर रही है केंद्र सरकार

100 दिन का रोजगार देने वाली ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बनाये गए जॉब कार्ड को केंद्र सरकार आधार से जोड़ने से कवायद में लगी हुई है। राज्य सभा में पूछे सवाल के जवाब में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया था कि मनरेगा में 80 फीसद जॉब कार्ड धारकों को आधार नंबर से जोड़ दिया गया है, लेकिन सरकार के ही आंकड़ों की बात करें तो दिसम्बर 2016 तक मनरेगा के अंतर्गत 25.89 करोड़ पंजीकृत मजदूरों में से सिर्फ 3.68 करोड को ही आधार से जोड़ा जा सका था।

सरकार के आंकड़ों की बात करें तो केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने संसद में जानकारी दी थी कि ‘ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मनरेगा के फंड का मिसयूज रोकने के के मकसद से अब तक 87 लाख फर्जी जॉब कार्ड्स को रद्द किये हैं। मंत्रालय ने इन कार्ड्स को फर्जी पाया या फिर लाभार्थियों की मौत हो चुकी थी।

रिपोर्ट की माने तो जाने माने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार कुछ राज्यों में आधार से जोड़ने के तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में मनरेगा जॉब कार्ड रद्द कर रही है। उनका कहना है कि कुछ राज्यों जैसे झारखंड और कर्नाटक में 100 फीसदी जॉब कार्ड को आधार के साथ जोड़े जाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़ी संख्या में इसे रद्द किया जा रहा है।

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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से पंजाब के मनरेगा के तहत बनाए गए मजदूरों के 56 हजार से अधिक जॉब कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। 60 हजार से अधिक जॉब कार्डों को जांच के बाद इन्हें रद्द करने की कैटेगरी में डाला गया था, जिनमें से उक्त 56,774 कार्डों को रद्द किया गया है। मंत्रालय की ओर से हरियाणा के 32 हजार से अधिक तथा राजस्थान के 1 लाख से अधिक जॉब कार्ड्स को रद्द किया गया है।

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