कांग्रेस के दिग्गज नेता बूटा सिंह का निधन, नेहरू-गांधी परिवार के करीबियों में थे शामिल

नई दिल्ली। कांग्रेस के दिग्गत नेता सरदार बूटा सिंह का आज निधन हो गया। इनकी गिनती कांग्रेस परिवार के बेहद करीबियों में की जाती थी। उन्होंने दिल्ली के एम्स में आज सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर आखिरी सांस ली। वह बीते लंबे समय से बीमारी से पीड़ित थे। वह 86 वर्ष के थे। सरदार बूटा सिंह की छवि हमेशा एक दलित मसीहा के तौर पर रही। बूटा सिंह ने अपना पहला चुनाव अकाली दल के सदस्य के रूप में लड़ा था और 1960 के दशक वे में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

वह पहली बार 1962 में साधना निर्वाचन क्षेत्र से तीसरी लोकसभा के लिए चुने गए थे। बाद में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री सहित कई पदों पर कार्य किया था। वे 2007 से 2010 तक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष थे। उन्होंने पंजाबी साहित्य और सिख इतिहास और पंजाबी स्पीकिंग स्टेट नामक पुस्तक (एक महत्वपूर्ण विश्लेषण) पर लेखों का संग्रह भी लिखा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेसी नेता बूटा सिंह के निधन पर शोक जताया। प्रधानमंत्री ने कहा, बूटा सिंह गरीबों और दलितों के कल्याण के लिए अनुभवी प्रशासक और प्रभावी आवाज थे। उनके निधन से दुखी हूं। बूटा सिंह के परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।

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वहीं, राहुल गांधी ने ट्वीट किया, सरदार बूटा सिंह के देहांत से देश ने एक सच्चा जनसेवक और निष्ठावान नेता खो दिया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा और जनता की भलाई के लिए समर्पित कर दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद रखा जाएगा। इस मुश्किल समय में उनके परिवारजनों को मेरी संवेदनाएं।

 

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