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दलित जेलर वर्षा डोंगरे ने भाजपा सरकार को फिर दी चुनौती, मचा बवाल

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रायपुर जेल की निलंबित दलित डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे को जेल विभाग एक और आरोप पत्र देने की तैयारी कर रहा है। दलित बेटी वर्षा ने बस्तर के हालात पर फेसबुक पोस्ट लिखा था जिसकी वजह से उन्हें 6 मई को निलंबित कर दिया गया था। उनका मुख्यालय अंबिकापुर निर्धारित किया गया है। जहां उन्हें उपस्थिति देनी होती है।

अब वर्षा डोंगरे ने इस आरोप पत्र पर तीखा प्रहार किया है। वर्षा ने अपने ताजा पोस्ट में लिखा है- आरोप पत्र में बेहद ही गैरजिम्मेदाराना आरोप लगाऐ गए हैं.ऐसा लगता है कि एक लोक सेवक जनता नहीं बल्कि सरकार का सेवक है। जबकि सरकार स्वयं जनता की सेवक है। इस तरह हम सबकी मालिक आम जनता है। सरकार ने हमें यह जमीन नहीं दी है बल्कि यह जमीन इस देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक नागरिक को स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।

सोमवार को वर्षा डोंगरे ने अंबिकापुर में ज्वाइनिंग देने से पहले एक और पोस्ट लिखी थी, जिसमें निलंबन के पहले दिए गए आरोप पत्र पर गंभीर सवाल उठाए थे। शुक्रवार 26 मई को अंबिकापुर में ज्वाइनिंग के बाद उन्हें सरकार की ओर से आरोप पत्र दिया गया। आरोप पत्र में वर्षा पर गंभीर आरोप लगाये गये हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वर्षा के फेसबुक पोस्ट और दूसरों के वाल पर किये गये कमेंट को आधार बनाया गया है।

गलत नीतियां. जिससे आम जनता का अहित होता हो. के विरूद्ध बोलने की स्वतंत्रता देश के सभी नागरिकों का संवैधानिक मौलिक अधिकार है। लोक सेवक को पारिश्रमिक, जनता के टैक्स द्वारा जमा किए गए पूंजी से प्राप्त होता है ना कि कोई शासन अपने स्वयं के जेब से देती है। इसलिए लोक सेवक की जवाबदेही और जिम्मेदारी जनता व शासन दोनों के प्रति होती है। शासन की नीतियों का पालन करने के साथ ही लोक सेवक का कार्य जनता का संवैधानिक संरक्षण सुनिश्चत करना भी है। हम अन्याय विरोधी हैं..सरकार विरोधी नहीं. जय संविधान. जय भारत.

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