नोटबंदी के दौरान सीमाओं पर तैनात सैनिक अब RBI के बाहर क्यों भटक रहे हैं ?

नोटबंदी के बाद 500 और 1000 के पुराने नोट जमा करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर तक कई लोग पैसे बैंकों में जमा नही कर पाए। इन लोगों में कई ऐसे सेना के जवान भी हैं जो उस दौरान सियाचीन और बस्तर जैसे इलाकों में तैनात थे। रिपोर्ट की माने तो आरबीआई के बाहर आज भी कई सैनिक भटक रहे जो 8 नवम्बर से 30 दिसंबर के बीच बस्तर या सियाचीन जैसी सीमाओं पर तैनात थे।

अब महेन्द्र के पास अपने पुराने नोट बदलने का कोई विकल्प फ़िलहाल नही है क्योंकि 31 मार्च तक वही लोग पैसे जमा कर सकते हैं जो उस दौरान देश से बाहर थे या जो प्रवासी भारतीय हैं। महेन्द्र सिंह का कहना है उन्हें ऐसा पता होता तो वह बस का किराया खर्च करके दिल्ली न आता।

महेन्द्र सिंह भी उन सैनिकों में शामिल हैं जो इस दौरान समुद्र तल से 20,000 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचीन सीमा पर तैनात थे। महेन्द्र के जेब में 6,000 हजार रूपये थे और उसने नवम्बर में छुट्टी के लिए आवेदन किया था लेकिन उसे छुट्टी नही मिली। जब महेन्द्र को छुट्टी मिली और उसे पता चला कि पुराने नोट जमा करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर को ख़त्म हो चुकी है तो वह राजस्थान के अपने गांव से बस पकड़कर दिल्ली आया।

पहले भी ऐसे तमाम मामले सामने आने के बाद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई थी जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई और केंद्र सरकार को नोटिस भेजा था। गौर करें तो नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था कि लोग 31 दिसंबर 2016 के बाद भी प्रक्रियागत औपचारिकता पूरी करके 31 मार्च (मार्च), 2017 तक रिजर्व बैंक की शाखाओं मे बंद की जा चुकी मुद्रा जमा कर सकते हैं।

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आरबीआई के बाहर पैसे बदलवाने के लिए आये एक और सीआरपीएफ जवान पंकज सिंह का कहना है कि वह उस दौरान वह झारखण्ड ले नक्सल प्रभावित इलाके में तैनात थे और उनके पास अब भी 19,000 के नोट मौजूद थे। वह ऐसे इलाके में मौजूद थे जहाँ रेडियो और फोन के सिग्नल नही आते हैं।

 

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