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बिहार: पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय को अपने ही सिपाही से मिली शिकस्त, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली। पिछले महीने बिहार पुलिस के डीजीपी पद को छोड़कर राजनीति में कूदे गुप्तेश्वर पाण्डेय को दूसरी बार भी शिकस्त मिली है। इसके पहले भी साल 2006 में वह सियासत के लिए नौकरी से इस्तीफा दे चुके थे। हालांकि तब भी उनका टिकट कंफर्म नहीं हुआ और बाद में उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया था। इस बार भी उनके साथ कमोबेश यही ​हुआ है।

हालांकिे इस बार गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey) को यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि उन्हें जिस मोहरे से मात मिली वो कोई नहीं बल्कि उनका ही पूर्व मुलाजिम है। बक्सर विधानसभा सीट के लिए पूर्व डीजीपी सामना उनके ही महकमे में सिपाही रहे परशुराम चतुर्वेदी से हुआ। सियासी उठा-पटक और सीट शेयरिंग में सिपाही अपने डीजीपी पर भारी पड़ा। परशुराम चतुर्वेदी ने 16 साल पहले 2004 में पुलिस की नौकरी छोड़ेकर राजनीति में कदम रखा था।

बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले यह तय था कि बक्सर सदर सीट एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में आएगी। इसके बावजूद गुप्तेश्वर पांडेय ने डीजीपी का पद छोड़कर जनता दल यूनाइटेड (JDU) का दामन थामा। टिकट न मिलने पर गुप्तेश्वर पाण्डेय सफाई भी दे रहे हैं लेकिन उनकी इच्छा बक्सर से ही चुनाव लड़ने की थी। टिकट फाइनल होने से पहले ही बक्सर में उनके कार्यालय खुल गए। उनकी तैयारियों के बीच बीजेपी में अंदर ही अंदर असंतोष बढ़ने लगा।

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बक्सर से सांसद और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहले ही बक्सर सदर सीट पर बीजेपी के ही किसी समर्पित कार्यकर्ता के प्रत्याशी बनने की बात कह चुके थे। इसके बाद चुनाव समिति को संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता राज्य कार्यकारिणी सदस्य परशुराम चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाना पड़ा। पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय के गांव गेरुआ बांध से 10 किलोमीटर दूर महदह के रहने वाले परशुराम चतुर्वेदी 1985 में बिहार पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे और 2004 में हवलदार पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में आ गए।

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