कोरोना वैक्सीन को लेकर बड़ी खुशखबरी, PGI रोहतक में पूरा हुआ ह्यूमन ट्रायल

चीन से फैले वायरस ने पूरी दुनिया को चपेट में ले लिया है, कोरोना से भारत समेत दुनियाभर के 200 से ज्यादा देशों में हाहाकार मचा है। हर दिन तेज होती रफ्तार ने दुनियाभर के सरकार और लेकर परेशान हैं। इन सबके बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत से अच्छी खबर आई है। पीजीआई रोहतक में कोवैक्सीन के मानव परीक्षण के फेज-1 का पहला चरण पूरा हो गया है। टीका परीक्षण टीम की मुख्य जांचकर्ता डॉ. सविता वर्मा ने कहा कि शनिवार को फेज-1 के दूसरे चरण में छह लोगों को टीका लगाया गया है। देश में 50 लोगों को वैक्सीन दिया गया है। इसके परिणाम उत्साहवर्धक हैं।

इस खबर ने उम्मीद की एक किरण जगा दी है। आपको बता दें कि कोवैक्सीन भारत का कोरोना वायरस का पहला टीका है, जिसे परीक्षण की इजाजत दी गई है। कोवाक्सिन का फेज 1 ट्रायल की शुरूआत 15 जुलाई 2020 से शुरू हुआ था। सबसे पहले एम्‍स पटना में इसके ट्रायल की शुरूआत की गयी थी। इसके बाद पीजीआई रोहतक में 17 जुलाई को इसका परीक्षण शुरू किया गया। इस दिन 3 लोगों को टीका दिया गया था। दूसर फेज के ट्रायल के लिए छह और लोगों को डोज दिया गया है।

आपको बता दें कि दिल्ली स्थित एम्स में कोवाक्सिन (Covaxin) वैक्सीन का सबसे बड़ ट्रायल चल रहा है। पहले फेज में एम्स 100 लोगों पर ट्रायल करना है। सूत्रों से मिल जानकारी के अनुसार एम्स में हो रहे ट्रायल को शामिल होने के लिए 3500 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, इनमें से आधे से अधिक लोग दूसरे राज्यों के हैं। इसके लिए तीस वर्षीय एक स्वस्थ्य युवक को मानव परीक्षण की सहमति ली गई है। शुक्रवार को युवक को वैक्सीन की पहली डोज तकरीबन 1.30 PM पर दी गई। डोज देने के 24 घंटे बाद तक युवक को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं देखी गई। लगभग 7 से 14 दिन तक युवक की निगरानी की जाएगी उसकी बाद स्टडी कर 10 और हेअल्थी लोगों को भी दिया जायेगा।

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भारत बायोटेक और आईसीएमआर और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ विरोलोग्य पुणे द्वारा बनाई गई कोवाक्सीन का मानव परीक्षण दिल्ली एम्स सहित देशभर के 12 अस्पतालों में किया जा रहा है। एम्स दिल्ली में सबसे जयादा 100 लोगों पर इसका परीक्षण होगा। जिसमे अभी से हज़ारों की संख्या में लोग रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं।

आपको बात दें कि कोवाक्सिन एक निष्क्रिय वैक्‍सीन है। यह उन कोरोना वायरस के पार्टिकल्‍स से बनी है जिन्‍हें मार दिया गया था ताकि वे इन्फेक्‍ट न कर पाएं। इसकी डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज बनती हैं।

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