उच्च न्यायलय से संजय गांधी की जैविक पुत्री की याचिका खारिज़,फिल्म इंदु सरकार पर रोक नही

बांबे हाई कोर्ट ने संजय गांधी की जैविक बेटी होने का दावा करने वाली महिला प्रिया पाल, की याचिका खारिज कर दी। महिला ने मधुर भंडारकर की आने वाली फिल्म ‘इंदु सरकार’ पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस अनूप मोहता और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की पीठ ने सोमवार को कहा कि याची प्रिया पाल ने अदालत को हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बताया है।बांबे हाई कोर्ट ने संजय गांधी की जैविक बेटी होने का दावा करने वाली महिला प्रिया पाल, की याचिका खारिज कर दी। महिला ने मधुर भंडारकर की आने वाली फिल्म ‘इंदु सरकार’ पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस अनूप मोहता और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की पीठ ने सोमवार को कहा कि याची प्रिया पाल ने अदालत को हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बताया है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संजय गांधी के किसी वंशज ने फिल्म पर आपत्ति नहीं की है। याची का ही दावा अपने आप में सवाल खड़ा करने वाला है। मधुरभंडारकर के वकील बिरेंद्र सर्राफ ने कहा कि याची संजय गांधी की जैविक पुत्री है इसका कोई सुबूत नहीं है। इस अदालत का ज्यादा समय इसी बात पर विचार करने में जाया हुआ कि वह उनकी बेटी है। बाद में वह उसे खुद को उनका वंशज होने में इस्तेमाल कर सकती है।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) फिल्म को प्रमाण पत्र दे चुका है। इस फिल्म के रिलीज होने पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं है। जस्टिस मोहता ने कहा, ‘फिल्म निर्माता ने कहा है कि फिल्म के शुरू में ही दिखाया जाएगा कि फिल्म के सभी पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं। किसी जीवित या मृत व्यक्ति से उसका कोई संबंध नहीं है। सेंसर बोर्ड ने कुछ दृश्यों को काटने के बाद फिल्म को प्रमाण पत्र दे दिया है।’

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उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में आपातकाल पर आधारित कई फिल्में बन चुकी हैं। सेंसर बोर्ड ने 12 दृश्यों पर कैंची चलाने के बाद फिल्म को यू-ए प्रमाण पत्र दिया है। यह फिल्म पूरी हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी और उनके प्रिय पुत्र संजय गांधी द्वारा आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियों को जनता के सामने न लाने देने के लिए कुछ कांग्रेसी नेताओं कद्वार फ़िल्म इंदु सरकार का विरोध किया जा रहा है। इलाहाबाद में जगह जगह जनता की भावनाओ के विपरीत फ़िल्म को रोकने हेतु पोस्टर लगाए गए है जबकि नागपुर आदि जगहों पी फ़िल्म निर्माता को फ़िल्म का प्रमोशन करने हेतु आयोजित सम्मेलन में भाग लेने से रोका भी गया। निर्माता मधुर भंडारकर को होटल के कमरे में ही बन्द रखा गया।

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